विश्व शांति का सर्कस: जहाँ मिसाइलें ‘इश्क’ बरसाती हैं और लोकतंत्र का तेल निकलता है दुनिया के रंगमंच पर इन दिनों एक ऐसा नाटक चल रहा है जिसे देखकर शेक्सपियर भी अपनी कब्र में लोट-पोट हो रहे होंगे। एक तरफ अंकल सैम यानी डोनाल्ड ट्रंप साहब हैं, जिनके पास शांति की बात करने के लिए आठ मुस्लिम देशों का कॉन्फ्रेंस कॉल है और युद्ध की धमकी देने के लिए एक जंगी जहाज की तस्वीर, जिसके नीचे बम लटका हुआ है। यह जियोपॉलिटिक्स नहीं, बल्कि किसी सरफिरे आशिक की दास्तान लगती है, जो एक दिन कहता है आई लव यू और दूसरे दिन घर के बाहर रॉकेट लांचर लेकर खड़ा हो जाता है। ईरान का इंटरनेट बम और ट्रंप का पीस मोड ईरान और अमेरिका की इस नूरा-कुश्ती में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पता चला कि ईरान के पास सिर्फ यूरेनियम नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का अंगूठा दबाने की ताकत है। वॉर हिस्टोरियन अमरेश मिश्रा जी बताते हैं कि ईरान ने धमकी दी है कि वह समुद्र के नीचे बिछी उन केबल्स को काट देगा जिससे दुनिया का इंटरनेट चलता है। जरा सोचिए, अगर ईरान ने स्टेट ऑफ हॉर्मुज में तार काट दिए, तो न रिलायंस का फालकन चलेगा और न टाटा का सिस्टम। गूगल, मेटा, यूट्यूब और इंस्टाग्राम सब बफरिंग में चले जाएंगे। दुनिया भर के कंटेंट क्रिएटर्स और रील्स बनाने वाली जनता के लिए यह किसी परमाणु हमले से बड़ा खतरा है। लेकिन हमारे ट्रंप साहब भी कम खिलाड़ी नहीं हैं। वह कभी पीस मोड में आ जाते हैं तो कभी प्री-वॉर मोड में। न्यूयॉर्क टाइम्स चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि न्यूक्लियर डील की कोई डिटेल साफ नहीं है, लेकिन ट्रंप साहब ट्विटर (अब X) पर थैंक यू फॉर योर अटेंशन लिखकर बमों की फोटो डाल रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे कोई दुकानदार कहे कि सेल खत्म हो गई है, पर आप अभी भी लाइन में लगे रहें। नेतन्याहू: को-ड्राइवर से परेशान पैसेंजर तक का सफर इस पूरी कहानी में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का किरदार किसी ऐसी फिल्म के साइड विलेन जैसा हो गया है जिसकी अपनी ही टीम में कोई इज्जत नहीं बची। सूत्रों के अनुसार, जो नेतन्याहू कभी ट्रंप के ‘को-ड्राइवर’ हुआ करते थे, अब उन्हें पिछली सीट पर पैसेंजर बनाकर बिठा दिया गया है। वह पीछे से बार-बार ड्राइवर को टोक रहे हैं, कभी गाजा पर बमबारी करके तो कभी लेबनान में आत्मरक्षा का राग अलाप कर, लेकिन ड्राइवर यानी ट्रंप उन्हें चुप रहने को कह रहे हैं। इजरायल ने अपनी सॉफ्ट पावर की जो छीछालेदर कराई है, वह बेमिसाल है। जो खुद को दुनिया की ‘सबसे मोरल आर्मी’ कहते थे, उनकी असलियत तब सामने आई जब सुमोद फ्लोटिला के एक्टिविस्टों के साथ जानवरों जैसा सलूक किया गया और उन पर यौन शोषण के आरोप लगे। अब हालत यह है कि फ्रांस ने इजरायली सामानों पर बैन लगा दिया है और इटली जैसे देश उनके मंत्रियों पर पर्सनल सैंक्शन लगाने की तैयारी कर रहे हैं। लगता है इजरायल का भौकाल हमास ने 7 अक्टूबर को ही नहीं, बल्कि उनकी अपनी हरकतों ने दुनिया भर में खत्म कर दिया है। भारत का नया इश्क और 42 लाख करोड़ का बिल अब बात करते हैं भारत की। यहाँ का मंजर तो और भी निराला है। मार्को रूबियो साहब भारत आते हैं, भारत मंडपम में प्रोग्राम होता है और ट्रंप साहब फोन पर कहते हैं कि उन्हें हिंदुस्तान से बहुत प्यार है। अब इस प्यार की कीमत भी सुन लीजिए करीब 500 अरब डॉलर (यानी 42 लाख करोड़ रुपये) का सामान भारत अमेरिका से खरीदेगा। वाह! इसे कहते हैं महंगा इश्क। एक तरफ देश की जनता बेरोजगारी से त्रस्त है, एफडीआई गिर रहा है, और दूसरी तरफ हम 20 बिलियन डॉलर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग में इन्वेस्ट करने जा रहे हैं। अमरेश मिश्रा जी का कहना है कि यह निवेश भारत की अपनी समस्याओं को सुलझाने के बजाय अमेरिकी इकॉनमी को ऑक्सीजन देने जैसा है। देश में पेट्रोल-डीजल के दाम चौथी बार बढ़ गए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी जनता से त्याग की अपील कर रहे हैं। अडानी साहब के ऊपर से केस वापस हो जाते हैं और वह तुरंत अमेरिका में निवेश का ऐलान कर देते हैं। यह कौन सा अर्थशास्त्र है जहाँ अपनी जेब खाली हो और हम पड़ोसी के घर में नया सोफा लगवा रहे हों? हज का बफर टाइम और मुस्लिम देशों की चालाकी युद्ध की तारीखें भी आजकल त्योहारों के हिसाब से तय हो रही हैं। ट्रंप साहब 19 मई को हमला करने वाले थे, लेकिन सऊदी अरब और कतर ने कह दिया कि भाई अभी रुक जाओ, हज चल रहा है। हज के बाद मुहर्रम आएगा, फिर कुछ और। मुस्लिम देशों ने भी ट्रंप को हैंडल करना सीख लिया है उन्हें डराकर या समझाकर हमले को टालते रहो। ट्रंप को भी इसमें फायदा है; वह अपने घरेलू दर्शकों को दिखाने के लिए जंगी माहौल बनाते हैं, जिससे तेल के दाम बढ़ते हैं और स्टॉक मार्केट ऊपर-नीचे होता है, जिसका फायदा उनके इन्वेस्टर दोस्तों को मिलता है। हज के पवित्र हफ्ते में करीब 11.6 मिलियन लोग सऊदी में मौजूद हैं। ऐसे में अगर कोई धमाका हुआ, तो वह केवल युद्ध नहीं, बल्कि दुनिया भर के मुसलमानों के गुस्से का विस्फोट होगा। ईरान ने साफ कह दिया है कि वह जून 2025 वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा और मुस्तफा खामनेई ने असीम मुनीर (पाकिस्तान के सेना प्रमुख) को स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब किसी प्रतीकात्मक हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। निष्कर्ष: एक कड़वा कटाक्ष कुल मिलाकर, यह ग्लोबल पॉलिटिक्स एक ऐसी सर्कस है जहाँ जोकर ने हाथ में बंदूक पकड़ी हुई है और रिंग मास्टर खुद पिंजरे में बंद है। भारत इस सर्कस में वह दर्शक है जो सबसे महंगी टिकट खरीदकर बैठा है, जिसे बार-बार बताया जा रहा है कि खेल बहुत शानदार है, भले ही उसकी अपनी जेब कट रही हो। ईरान के पास इंटरनेट काटने का कार्ड है, ट्रंप के पास ट्वीट्स का, और नेतन्याहू के पास केवल न्यूसेंस वैल्यू। भारत के पास क्या है? हमारे पास है 100% विश्वास का वादा और 500 अरब डॉलर का बिल। जब तक जनता हिंदू-मुसलमान के कार्ड में उलझी है, तब तक सत्ता के गलियारों में गुलामी और डील के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। शायद अगली बार पेट्रोल पंप पर जब आप तेल डलवाएं, तो याद रखिएगा कि यह बढ़ा हुआ दाम दरअसल उस इश्क की कीमत है जो सात समंदर पार से हम पर बरसाया जा रहा है। Kanthak Suryatal Post Views: 770 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation बाबा विश्वनाथ यांच्या नगरीत पर्यटकांचा खून;रामराज्य हेच काय? का म्हणाले पहिल्यांदा खा. राहुल गांधी की येत्या वर्षभरात केंद्र सरकार पडणार