नांदेड़ – नांदेड़ स्थित गुरुद्वारा बोर्ड प्रशासन एक बार फिर विवादों के घेरे में है। बोर्ड के प्रशासक डॉ. विजय सतबीर सिंह की निजी सहायक (PA) महिला और उनके परिजनों पर गुरुद्वारा बोर्ड की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं।
बाजार भाव से कम किराया और अवैध कब्जा ताजा मामला नांदेड़ रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित सर्वे नंबर 25 (पीआर कार्ड नंबर 11250) की जमीन से जुड़ा है। यह जमीन गुरबीर सिंह किशन सिंह चाहल के नाम पर किराये पर दी गई है, जो कथित तौर पर प्रशासक की पीए मैडम के करीबी रिश्तेदार हैं। सूत्रों के अनुसार, जिस जमीन का बाजार भाव लगभग ₹10,000 प्रति माह होना चाहिए, उसे मात्र ₹50 प्रति माह के मामूली किराये पर आवंटित किया गया है। इतना ही नहीं, आवंटित दुकान के आसपास की जमीन पर भी अवैध रूप से टीन शेड डालकर कब्जा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि प्रशासन से केवल दुकान की छत बदलने की अनुमति ली गई थी।
प्रशासनिक मिलीभगत और पद का दुरुपयोग पूर्व जिलाध्यक्ष (भारतीय मजदूर संघ) सरदार दीपक सिंह रतन सिंह गल्लीवाले ने आरोप लगाया है कि पीए महिला को प्रशासक का सीधा संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण एस्टेट विभाग और सुपरिंटेंडेंट कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। आरोप है कि पीए महिला के पास योग्यता (जैसे टाइपिंग, डीटीपी, एमएस ऑफिस) न होने के बावजूद उन्हें न केवल यह पद दिया गया, बल्कि तीन-तीन कार्यालय और अवैध प्रमोशन जैसी सुख-सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। इससे अन्य ईमानदार और वरिष्ठ कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
वैधानिक नियमों का उल्लंघन और पद को खत्म करने की मांग सरदार संपूर्ण सिंह गिल ने महाराष्ट्र शासन और प्रशासक को निवेदन भेजकर बताया है कि पीए जैसा पद वैधानिक रूप से अवैध है और यह सुपरिंटेंडेंट के अधिकारों का अतिक्रमण करता है। उन्होंने इस पद को तुरंत समाप्त करने की मांग की है। इसके अलावा, यह भी चर्चा है कि बोर्ड के पुराने नियमों (एक्ट) को बदलने की साजिश रची जा रही है ताकि भविष्य में किसी महिला को सुपरिंटेंडेंट बनाया जा सके, जबकि वर्तमान एक्ट के अनुसार केवल पुरुष ही इस पद पर नियुक्त हो सकते हैं।
कड़ी कार्रवाई की मांग दीपक सिंह गल्लीवाले ने इस मामले में निम्नलिखित कड़ी कार्रवाई की मांग की है:
- निलंबन और जांच: महाराष्ट्र नागरी सेवा नियम, 1979′ के तहत दोषी कर्मचारी को तुरंत निलंबित किया जाए।
- बर्खास्तगी: नैतिक पतन और संपत्ति हड़पने के आरोप में नौकरी से बर्खास्तगी।
- लीज रद्दीकरण: शर्तों के उल्लंघन के आधार पर जमीन का किराया समझौता तुरंत रद्द हो।
- जुर्माना और एफआईआर: अवैध कब्जा हटाने का खर्च वसूलना और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज करना।
संगत (सिख जनता) और स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गुरुद्वारा बोर्ड की संपत्तियों से अवैध कब्जे नहीं हटाए गए और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
