नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला

“जो मागहि ठाकुर अपने ते, सोई सोई देवे ॥”
“नानक दास मुख ते जो बोलै, ईहा ऊहा सचु होवे ॥”
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, अंग 681

भावार्थ एवं विस्तृत अर्थ

गुरु साहिब इस पवित्र वाणी के माध्यम से समझाते हैं कि परमात्मा सर्वशक्तिमान, दयालु और पालनहार है। जब मनुष्य सच्चे हृदय, श्रद्धा, विश्वास और प्रेम से परमात्मा के चरणों में अरदास करता है, तो वह उसकी आवश्यकताओं को जानता है और उसके लिए जो कल्याणकारी होता है, वही प्रदान करता है।

इसका अर्थ केवल धन, संपत्ति या सांसारिक वस्तुएँ प्राप्त करना नहीं है। कई बार मनुष्य कुछ और माँगता है, लेकिन परमात्मा उसकी भलाई के लिए उसे कुछ और देता है। क्योंकि परमात्मा वर्तमान ही नहीं, भविष्य को भी जानता है। वह वही देता है जो अंततः मनुष्य के लिए हितकारी हो।

कभी-कभी हमें लगता है कि हमारी अरदास स्वीकार नहीं हुई, लेकिन समय बीतने पर समझ में आता है कि परमात्मा ने हमें उस चीज़ से बचाया जो हमारे लिए उचित नहीं थी। इसलिए सच्ची अरदास केवल वस्तुओं की प्राप्ति नहीं, बल्कि परमात्मा की रज़ा को स्वीकार करने की शक्ति प्राप्त करना भी है।

गुरु साहिब हमें यह भी सिखाते हैं कि परमात्मा से केवल धन-दौलत नहीं, बल्कि विवेक, नम्रता, सेवा-भाव, संतोष, प्रेम, सत्य, चढ़दी कला और नाम की दात माँगनी चाहिए। ये ऐसी संपत्तियाँ हैं जो जीवन को सुखी, सफल और सार्थक बनाती हैं।

जीवन के लिए प्रेरणा

जब जीवन में कठिन समय आता है, आर्थिक संकट आता है, अपने पराए हो जाते हैं, मेहनत का फल देर से मिलता है या परिस्थितियाँ मन के अनुसार नहीं चलतीं, तब निराश होने की आवश्यकता नहीं है। परमात्मा की अदालत में देर हो सकती है, परंतु अंधेर नहीं होता।

जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चे को वही देते हैं जो उसके लिए उचित होता है, उसी प्रकार परमात्मा भी अपने भक्त को वही प्रदान करता है जो उसके लिए कल्याणकारी हो। इसलिए चिंता करने के बजाय विश्वास बनाए रखना चाहिए।

यदि आज आपकी कोई इच्छा पूरी नहीं हुई है, तो संभव है कि परमात्मा आपके लिए उससे भी बेहतर कुछ तैयार कर रहा हो, या आपको किसी बड़े नुकसान से बचा रहा हो। इसलिए मन में विश्वास, होठों पर शुक्राना और कर्मों में ईमानदारी बनाए रखें।

जो व्यक्ति परमात्मा पर भरोसा रखता है, मेहनत करता है, सत्य के मार्ग पर चलता है और किसी का बुरा नहीं चाहता, वह अंततः मन की शांति और संतोष अवश्य प्राप्त करता है।

माँगना ही है तो परमात्मा से ऐसी बुद्धि माँगिए जो सही और गलत में अंतर समझाए, ऐसा हृदय माँगिए जो सबका भला चाहे, और ऐसी शक्ति माँगिए जो हर परिस्थिति में चढ़दी कला में रहने की प्रेरणा दे। बाकी जो वास्तव में आवश्यक होगा, वह परमात्मा स्वयं प्रदान कर देगा।

“नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला।”

– राजेंद्र सिंघ शाहू
इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड
7700063999

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!