
संघर्ष की शुरुआत और सैन्य कार्रवाई
इस ताज़ा विवाद की जड़ें मई 2026 की शुरुआत में हुई सैन्य कार्रवाइयों में हैं। अमेरिकी सेना ने प्रोजेक्ट फ्रीडम (Project Freedom) या ऑपरेशन लिबर्टी शुरू किया है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना और अमेरिकी नौसेना द्वारा उन्हें एस्कॉर्ट करना है। इस ऑपरेशन के दौरान, अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान की आईआरजीसी (IRGC) की पांच स्पीड बोट्स पर हमला किया, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। अमेरिका का कहना है कि ये नावें हमलावर थीं, लेकिन ईरानी मीडिया और सैन्य सूत्रों का दावा है कि ये आम नागरिक मालवाहक नौकाएं (Civilian Cargo Boats) थीं और मरने वाले पांचों आम नागरिक थे। इस हमले के जवाब में ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की ओर से अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की खबरें हैं। हालांकि अमेरिका ने शुरुआत में इन हमलों को खारिज किया, लेकिन बाद में यह बात सामने आई कि आईआरजीसी ने कम से कम दो मिसाइलें अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर दागीं। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फजेराह (Fujairah) स्थित तेल सुविधा केंद्र पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां भीषण आग लग गई। फजेराह एक महत्वपूर्ण पाइपलाइन हब है जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करता है।

क्षेत्रीय अस्थिरता और आपातकाल
तनाव का असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देशों में भी खलबली मची हुई है। बहराइच (Bahrain) में राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) घोषित कर दिया गया है और रेड अलर्ट जारी किया गया है। ब्रिटेन की सेना ने भी अमीरात तट के पास एक मालवाहक जहाज में आग लगने की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, इजराइल की भूमिका भी इस तनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसी अटकलें हैं कि इजराइल इस युद्ध को भड़काने की कोशिश कर रहा है ताकि वह ईरान की परमाणु शक्ति को हमेशा के लिए खत्म कर सके। कुछ रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि अमेरिका और इजराइल अगले 24 घंटों के भीतर ईरान पर कोई बड़ा हमला कर सकते हैं।

‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की विफलता और ट्रंप का विरोधाभासी रुख
स्रोत के अनुसार, अमेरिका का प्रोजेक्ट फ्रीडम जमीन पर पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। मेरिटाइम ट्रैकिंग डेटा (Maritime Tracking Data) और एचएफआई रिसर्च (HFI Research) के हवाले से बताया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में 100% ईरान के नियंत्रण में है। डेटा के अनुसार, पिछले 24 घंटों में अमेरिका का एक भी जहाज इस रास्ते से नहीं निकल सका है, जबकि ईरान से जुड़े कम से कम तीन जहाज (दरिया नूह, गैस और जेविया) सुरक्षित रूप से वहां से गुजर गए। राष्ट्रपति ट्रंप का रुख इस पूरे संकट में अत्यंत विरोधाभासी और अस्थिर दिखाई दे रहा है। एक तरफ वे सोशल मीडिया पर ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देने की धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे चीन के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने में मदद करे। ट्रंप ने चीन से अपील की है कि वह ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी और भारत जैसे देशों को एलपीजी (LPG) की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करे। चर्चा में यह बात उभर कर आई है कि ट्रंप का यह व्यवहार उनकी हताशा को दर्शाता है, क्योंकि उनके द्वारा लगाया गया ब्लॉकेड (नाकेबंदी) फेल हो गया है।

ईरान की रणनीति और शर्तें
ईरान की आईआरजीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे विदेशी सैन्य उपस्थिति, विशेष रूप से अमेरिकी नौसेना को बर्दाश्त नहीं करेंगे। ईरानी संसद के स्पीकर गलीबा और विदेश मंत्री अब्बास अराक्षी ने कहा है कि प्रोजेक्ट फ्रीडम असल में प्रोजेक्ट डेडलॉक (Project Deadlock) है। ईरान का कहना है कि नागरिक और वाणिज्यिक जहाज (Commercial Ships) सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं, लेकिन उन्हें ईरान द्वारा बनाए गए नए नियमों, रूट्स और कोऑर्डिनेशन सिस्टम का पालन करना होगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी इन नियमों का उल्लंघन करेगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार: तेल की कीमतों में उछाल
इस सैन्य संघर्ष का सबसे भयावह प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। होर्मुज संकट के शुरू होते ही ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में 6% का भारी उछाल आया है। विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि यह युद्ध और भड़का, तो कच्चे तेल की कीमत $350 से $370 प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। यदि कीमतें इस स्तर तक पहुंचती हैं, तो यह वैश्विक तबाही का कारण बन सकती हैं। $370 प्रति बैरल का मतलब होगा कि दुनिया की आधी आबादी भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगी और परिवहन से लेकर उत्पादन तक सब कुछ ठप हो जाएगा। स्रोत में यह भी टिप्पणी की गई है कि भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बहुत नाजुक है, और ट्रंप द्वारा चीन से भारत की मदद की अपील करना उनकी अपनी विफलता को स्वीकार करने जैसा है।

निष्कर्ष
वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक जलमार्ग नहीं, बल्कि विश्व शांति और अर्थव्यवस्था की धुरी बन गया है। ईरान का दावा है कि वह युद्ध नहीं चाहता लेकिन अपनी संप्रभुता से समझौता भी नहीं करेगा। दूसरी ओर, अमेरिका की आंतरिक राजनीति और इजराइल का दबाव स्थिति को और अधिक जटिल बना रहा है। ट्रम्प के अनुसार यह मिनी वॉर वास्तव में एक छोटे संघर्ष तक सीमित रहेगा, या यह एक विनाशकारी वैश्विक युद्ध की प्रस्तावना है? इसका उत्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या राजनयिक बातचीत सफल होती है या सैन्य अहंकार मानवता को एक बड़े संकट में झोंक देता है। फिलहाल, होर्मुज में सन्नाटा है, लेकिन यह सन्नाटा किसी बड़े तूफान से पहले की शांति भी हो सकता है।
