सिख मर्यादा के अनुसार शस्त्र को सम्मानपूर्वक रखा और धारण किया जाना चाहिए। भारत के संविधान तथा प्रचलित कानूनों के अंतर्गत सिख समुदाय को धार्मिक परंपरा के रूप में कृपाण धारण करने की विशेष मान्यता प्राप्त है, किन्तु इसके साथ कानून, सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना भी प्रत्येक सिख का कर्तव्य है।
तख़त श्री हजूर साहिब सहित पांचों तख्तों की परंपरा सिखों को संत-सिपाही का आदर्श प्रदान करती है। इसका अर्थ है कि सिख आध्यात्मिकता, अनुशासन, विनम्रता और जिम्मेदारी के साथ शस्त्र धारण करे। विशेष रूप से नांदेड़ और अन्य सिख बहुल क्षेत्रों में भी शस्त्रों का प्रदर्शन, उपयोग अथवा लेन-देन सदैव मर्यादा और कानून के दायरे में होना चाहिए।
वर्तमान समय में विभिन्न स्थानों पर पुलिस द्वारा अवैध हथियारों के विरुद्ध अभियान और जांच की जा रही है। ऐसे समय में प्रत्येक सिख का दायित्व है कि वह धार्मिक मर्यादा का पालन करे, प्रशासन के साथ सहयोग करे तथा यह सुनिश्चित करे कि शस्त्र किसी अपराधी, असामाजिक तत्व या गलत उद्देश्य रखने वाले व्यक्ति तक न पहुंचे।
खालसा की पहचान अनुशासन, सेवा, संयम और न्याय से है। इसलिए किसी भी प्रकार के शस्त्र को गलत कार्यों के लिए न बेचना, न उपलब्ध कराना और न ही उसका दुरुपयोग करना सच्चे सिख का कर्तव्य है। शस्त्र तभी सम्मानित है जब उसका उपयोग धर्म, मानवता और सुरक्षा के लिए हो। यही गुरु साहिबानों की शिक्षा और खालसा पंथ की वास्तविक मर्यादा है। शस्त्र धारण करो, परंतु मर्यादा, कानून और गुरु की शिक्षा के अधीन रहकर; क्योंकि खालसा का बल अनुशासन और धर्म में है, न कि शक्ति के दुरुपयोग में।
– जी. एच.कालरा
