अमेरिका की समुद्री डकैती और ईरान की चेतावनी
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ओमान के तट के करीब भारतीय चालक दल वाले मर्चेंट जहाजों पर हुए हमलों के बाद ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका को एक तीखी चेतावनी जारी की है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, इस्माइल बघाई ने अमेरिका की इन कार्रवाइयों को सशस्त्र चोरी (armed theft) और समुद्री डकैती (maritime piracy) करार दिया है। ईरान का स्पष्ट आरोप है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अपनी दादागिरी दिखा रहा है और हथियारों के दम पर दूसरे देशों के जहाजों को निशाना बनाकर समुद्री नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। ईरान ने वाशिंगटन पर उच्च समुद्र (high seas) में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है और संकट के इस समय में सीधे तौर पर भारत का समर्थन किया है। बघाई के अनुसार, अमेरिका ने उन सुरक्षित रास्तों को खतरे में डाल दिया है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं, और यदि हॉर्मुज और ओमान में यह दादागिरी जारी रही, तो अमेरिका को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
भारतीय जहाजों पर हमले और बचाव कार्य
इन हमलों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय चालक दल वाले तीन अलग-अलग जहाजों को निशाना बनाया गया:
1. टैंकर मैरीवक्स (MT Marivox):ओमान के तट के करीब हुए इस पहले हमले में जहाज पर 24 भारतीय नागरिक मौजूद थे। इन लोगों ने जान बचाने की गुहार लगाई, जिसके बाद भारतीय अधिकारियों के संपर्क करने पर ओमान की नेवी ने इन्हें सुरक्षित रेस्क्यू किया।
2. टैंकर सेटबोलो (MT Setbolo): इस जहाज पर हुए हमले में 21 भारतीय मौजूद थे, जिनमें से दुर्भाग्यवश तीन लोगों की मौत हो गई। शेष क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू कर लिया गया, लेकिन इस घटना ने हॉर्मुज क्षेत्र में जबरदस्त तनाव पैदा कर दिया।
3. एमटी जलवीर (MT Jalveer): तीसरा हमला ओमान के शहनाज हार्बर (बंदरगाह) पर हुआ, जहाँ फंसे चालक दल के सदस्यों को काफी मशक्कत के बाद ओमान की मदद से निकाला गया।
हालांकि इन जहाजों पर दूसरे देशों के झंडे लगे हुए थे, लेकिन इनमें काम करने वाले अधिकांश लोग भारतीय थे, जिसके कारण भारत सरकार ने भी अमेरिकी मिशन के कार्यवाहक प्रमुख को तलब कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
ईरान का भारत के प्रति निस्वार्थ झुकाव: हम कुछ नहीं करते, फिर भी ईरान साथ है
एक बड़ा प्रश्न यह उठता है कि अंतरराष्ट्रीय दबावों और प्रतिबंधों के बीच अक्सर भारत को ईरान के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने में कठिनाई होती है, फिर भी ईरान हर मुश्किल घड़ी में भारत के साथ क्यों खड़ा रहता है?
ईरान ने पिछले डेढ़-दो वर्षों में लगातार भारत को रियायती दरों पर तेल देने का प्रस्ताव दिया है। ईरान ने हमेशा यह कहा है कि आप जितना तेल लेना चाहें, हम देने को तैयार हैं”। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अन्य कूटनीतिक कारणों से भारत इस व्यापार को उस स्तर तक नहीं ले जा पाया है, फिर भी ईरान का यह रुख भारत के प्रति उसकी निष्ठा को दर्शाता है।
2. सुप्रीम लीडर का भारत प्रेम
ईरान के सर्वोच्च नेता, अली खामनेई ने कई बार सार्वजनिक रूप से भारत और यहाँ के लोगों के प्रति अपनी मोहब्बत का इजहार किया है। उनकी कोशिशों का ही परिणाम है कि पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच सामरिक और कूटनीतिक संबंध बेहद मजबूत हुए हैं। भारत में भी एक बड़ा वर्ग उन्हें न केवल एक नेता के रूप में, बल्कि एक बेहतरीन इंसान के रूप में पसंद करता है।
3. चाबहार पोर्ट और सामरिक सहयोग
चाबहार बंदरगाह को लेकर ईरान का सहयोग भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, टैरिफ और व्यापार के अन्य मुद्दों पर भी ईरान ने हमेशा भारत के हितों का ध्यान रखा है।
भारत का जवाबी समर्थन
चीन में हुई एससीओ (SCO) की बैठक के दौरान भारत ने ईरान पर हुए हमलों की आलोचना की थी।
संयुक्त राष्ट्र (UN) में जब ईरान के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाना था, तब भारत ने उस प्रस्ताव का विरोध किया था।
इसके बावजूद, जिस तरह से ईरान डंके की चोट पर अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के सामने भारत के लिए खड़ा होता है, वह अद्वितीय है।
हॉर्मुज में युद्ध जैसी स्थिति
वर्तमान में हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति अत्यंत नाजुक है। अमेरिका और ईरान की सेनाएं और जहाज आमने-सामने खड़े हैं。 ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी सेना इस क्षेत्र से पीछे नहीं हटती, तब तक शांति की संभावना कम है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने हाल ही में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने के लिए शाहिद ड्रोन का भी उपयोग किया है, क्योंकि वे ईरान के जलक्षेत्र के बहुत करीब आ गए थे। डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि हमलों की योजना को फिलहाल टाल दिया है, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है। ईरान के 2 लाख सैनिक किसी भी अमेरिकी ऑपरेशन का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं और उन्होंने अपने प्रमुख द्वीपों जैसे खर्ग, केशम और अबू मूसा की सुरक्षा बढ़ा दी है。
निष्कर्ष
ईरान का भारत के प्रति यह रवैया केवल कूटनीति नहीं, बल्कि एक गहरी दोस्ती का प्रतीक है। ऐसे समय में जब भारत के जहाजों और नागरिकों पर संकट आया, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की दुहाई देते हुए अमेरिका को न केवल ललकारा, बल्कि भारत के पक्ष में मजबूती से बात भी रखी। भले ही वैश्विक समीकरणों के कारण भारत, ईरान के लिए उतना न कर पाता हो जितना अपेक्षित है, लेकिन ईरान ने बार-बार साबित किया है कि वह भारत का एक भरोसेमंद और निडर मित्र है।
