अमेरिका और ईरान के बीच वर्तमान तनाव ने पूरी दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहाँ शांति और विनाशकारी युद्ध के बीच केवल 50-50 प्रतिशत की संभावना बची है। 24 मई की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में हालात बेहद गंभीर हैं और आने वाला समय यह तय करेगा कि क्या कूटनीति सफल होगी या यह क्षेत्र एक भीषण युद्ध की आग में झुलस जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध स्तर पर तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की गंभीरता को देखते हुए अपने व्यक्तिगत कार्यक्रमों तक को स्थगित कर दिया है। खबरों के अनुसार, ट्रंप ने अपने बेटे की शादी में शामिल होने का कार्यक्रम रद्द कर दिया और वीकेंड पर वापस व्हाइट हाउस लौट आए। उनका मानना है कि इस नाजुक समय में व्हाइट हाउस में मौजूद रहना देश की सुरक्षा के लिए बेटे की शादी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। सीबीएस न्यूज के दावों के अनुसार, अमेरिका शुक्रवार (जुम्मे के दिन) ही ईरान पर हमला करने वाला था, लेकिन अंतिम समय में बातचीत और समझौतों की उम्मीद दिखने के कारण इस स्ट्राइक को टाल दिया गया। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि ईरान के साथ समझौता होने या दोबारा युद्ध शुरू होने की संभावना बराबर (50-50) है और इस पर अंतिम फैसला रविवार तक लिया जा सकता है। मनोवैज्ञानिक युद्ध और सैन्य धमकियाँ अमेरिका और ईरान के बीच केवल जमीनी युद्ध की आहट नहीं है, बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध भी अपने चरम पर है। व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन सेविनो ने अमेरिका के सबसे घातक स्टेल्थ बी-2 बमवर्षक विमान का एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो के साथ किसी कैप्शन की आवश्यकता नहीं समझी गई, क्योंकि विमान की घातकता ही अपने आप में एक बड़ी चेतावनी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और उसे हमले की धमकी देने के उद्देश्य से साझा किया गया है। दूसरी ओर, ट्रंप ने ईरान का एक नया नक्शा जारी किया है जिसे उन्होंने अमेरिकी झंडे से ढक दिया है और उसे यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ मिडिल ईस्ट का नाम दिया है। यह कदम ईरान की संप्रभुता को चुनौती देने वाला माना जा रहा है और इससे तनाव और अधिक बढ़ गया है। ईरान का पलटवार और विनाशकारी चेतावनी ईरान ने भी अमेरिका की इन धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के प्रतिनिधि मुस्तबा खामनेई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस बार युद्ध छिड़ा, तो यह केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान आत्मसमर्पण करने वाला देश नहीं है और उनका इतिहास इसका गवाह है ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गलीबाफ ने कहा कि यदि ट्रंप हमला करते हैं, तो ईरान का जवाब विनाशकारी होगा। ईरान ने दावा किया है कि छह सप्ताह के युद्ध विराम के दौरान उसने अपनी सैन्य क्षमताओं को व्यापक रूप से पुनर्गठित और मजबूत कर लिया है। गलीबाफ के अनुसार, युद्ध की स्थिति में ईरान का पहला कदम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मौजूद सात महत्वपूर्ण इंटरनेट केबलों को काटना और बाबल मंडेब को मिसाइलों से बंद करना होगा। इससे पूरी दुनिया का संचार और व्यापार ठप हो सकता है। कूटनीतिक प्रयास और मध्यस्थता की भूमिका युद्ध के इन बादलों के बीच शांति के प्रयास भी जारी हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर इस समय ईरान में हैं और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उनके साथ हुई बैठकों में गलीबाफ और अन्य ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने राष्ट्र के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेंगे। ईरान ने अमेरिका को एक शांति प्रस्ताव भी भेजा है। इस प्रस्ताव के तहत यदि अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाता है, ब्लॉकेज खत्म करता है और फ्रीज किए गए धन को रिलीज करता है, तो ईरान बिना किसी टोल के ‘होर्मुज’ का रास्ता खोल सकता है। साथ ही, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर 30 दिन बाद अगले चरण की चर्चा का प्रस्ताव भी दिया गया है। हालांकि, अमेरिका को संदेह है कि इस 30 दिन की अवधि का उपयोग ईरान परमाणु बम बनाने के करीब पहुंचने के लिए कर सकता है। इसी दौरान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य बड़े नेता भी सक्रिय हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत में हैं, जबकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चीन की यात्रा पर हैं। ये गतिविधियाँ संकेत देती हैं कि या तो पर्दे के पीछे किसी बड़े समझौते की तैयारी है या फिर किसी बड़े सैन्य धमाके की。 अमेरिकी प्रशासन में आंतरिक उथल-पुथल युद्ध की इन धमकियों के बीच अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है। अमेरिकी खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने इस्तीफे का कारण अपने पति की बीमारी बताया है, लेकिन युद्ध के मुहाने पर खड़े देश में इस तरह का इस्तीफा कई सवाल खड़े करता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रशासन के भीतर मतभेदों का परिणाम हो सकता है。 इसके अतिरिक्त, अमेरिका ने ईरान के साथ चल रही परमाणु बातचीत और युद्ध विराम चर्चाओं से इजराइल को लगभग बाहर कर दिया है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी अब इजराइल को इन गुप्त वार्ताओं की सीधी जानकारी नहीं दे रहे हैं。 क्षेत्रीय सुरक्षा और मानवीय संकट ईरान का हवाई क्षेत्र (एयर स्पेस) अभी भी नागरिक विमानों के लिए बंद है, जो किसी भी समय होने वाले हमले के डर को दर्शाता है। इस बीच, इजरायली सीमा में एक अज्ञात फाइटर जेट के घुसने की खबर ने उत्तरी इजराइल में हवाई हमले के सायरन बजा दिए, जिससे तनाव और गहरा गया है। युद्ध की इस आहट का असर केवल सेनाओं तक सीमित नहीं है। गजा में जारी संघर्ष और खाद्य संकट ने बच्चों को बुरी तरह प्रभावित किया है। अस्पतालों में बड़ी संख्या में बच्चे संक्रमण और त्वचा रोगों से जूझ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण साफ पानी और दवाइयों की कमी है। इसके अलावा, दुनिया के 27 देशों ने वर्ल्ड बैंक से मदद की गुहार लगाई है, क्योंकि ईरान संकट की वजह से उनकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है。 निष्कर्ष: आगे की राह वर्तमान स्थिति अत्यंत अनिश्चित है। जहाँ एक तरफ 60 दिनों तक युद्ध विराम बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, वहीं ट्रंप का रुख इसे कभी भी युद्ध में बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका तीसरी बार हमला करता है, तो वह ईरान को दुनिया की नजरों में एक हीरो के रूप में स्थापित कर सकता है, जैसा कि पिछले 40 दिनों की लड़ाई में हुआ था। ईरान का अब एकमात्र लक्ष्य अमेरिका को अधिकतम नुकसान पहुँचाना और उसके जहाजों को गिराना है, जिसमें उसे रूस और चीन का मौन समर्थन प्राप्त हो सकता है। अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक सम्मानजनक एग्जिट (Honorable Exit) लेने की है। क्या ट्रंप शांति का रास्ता चुनेंगे या अपनी सुपरपावर की छवि बनाए रखने के लिए एक नया मोर्चा खोलेंगे, इसका उत्तर आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा। Kanthak Suryatal Post Views: 554 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn 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