चार दीवारों के भीतर जितना मन हो उतना रो लीजिए, अपना मन हल्का कर लीजिए; लेकिन संसार के सामने आते समय चेहरे पर मुस्कान बनाए रखिए। क्योंकि कठिनाइयाँ हर किसी के जीवन में आती हैं, परंतु उनका साहसपूर्वक सामना करने वाले ही आगे बढ़ते हैं।
ईमानदारी से कार्य करने वाले व्यक्ति को दो पुरस्कार अवश्य मिलते हैं विरोध और आलोचना। क्योंकि जो लोग कुछ अलग, अच्छा और समाजहित में कार्य करते हैं, उनकी परीक्षा हमेशा ली जाती है। सीप की तरह बहुत कम लोग होते हैं जो अपना स्वार्थ देखे बिना दूसरों को मोती के समान तराशने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोग समाज की वास्तविक संपत्ति होते हैं। कौन से कपड़े पहनने से मैं अच्छा दिखूँगा, यह विचार तो हम प्रतिदिन करते हैं; लेकिन कौन सा अच्छा कर्म करने से मैं लोगों के दिलों में स्थान बना सकूँगा, यह विचार समाज में वास्तविक परिवर्तन ला सकता है।
प्रश्न उत्पन्न करने वाले लोग बुद्धिमान होते हैं, लेकिन प्रश्न उत्पन्न ही न हों, इसके लिए कार्य करने वाले लोग विवेकवान होते हैं। जीवन में जो व्यक्ति आपका सम्मान करते हुए आपको साथ लेकर चलता है, उसी का सम्मान बनाए रखिए। क्योंकि इस संसार में सम्मान देने वाले कम और कान भरने वाले अधिक होते हैं। बिना कारण चिंता करना ऐसा है जैसे बिना ऋण लिए उसके ब्याज का भुगतान करना। वर्तमान में जीना सीखिए, प्रयास कीजिए और परिणाम परमात्मा पर छोड़ दीजिए।
अक्षर कितने भी सुंदर क्यों न हों, लोगों की दृष्टि सबसे पहले काटे गए या सुधारे गए शब्दों पर जाती है। उसी प्रकार किसी व्यक्ति के गुण कितने भी अच्छे क्यों न हों, उसकी एक छोटी-सी गलती सबसे पहले दिखाई देती है। इसलिए आलोचना से डरने के बजाय स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहिए।
आँखें भावनाओं को व्यक्त करती हैं, स्पर्श सांत्वना देता है; लेकिन सही समय पर बोले गए प्रेमपूर्ण शब्द सीधे हृदय को स्पर्श कर लेते हैं। इसलिए शब्दों का प्रयोग सोच-समझकर कीजिए। असत्य और अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं, जबकि सत्य का प्रसार धीरे-धीरे होता है। इसलिए सत्य का मार्ग कभी मत छोड़िए।
दृढ़ संकल्प के मार्ग पर शांति, धैर्य और निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण साथी होते हैं।
शत्रु बनाना भी उतना आसान नहीं होता जितना लोग समझते हैं; इसके लिए बहुत अच्छे कार्य करने पड़ते हैं। क्योंकि आपकी प्रगति और सफलता कई लोगों को असहज कर देती है। सिद्धांतों को बेचकर प्राप्त किया गया लाभ समुद्र के पानी के समान होता है बहुत अधिक होने पर भी वह प्यास नहीं बुझा सकता।
दुनिया से बात करने के लिए फोन आवश्यक होता है, लेकिन परमात्मा से संवाद करने के लिए मौन आवश्यक होता है। फोन पर बात करने के लिए धन देना पड़ता है, जबकि परमात्मा से बात करने के लिए मन देना पड़ता है। धन को ही सबसे अधिक महत्व देने वाला व्यक्ति अक्सर भटक जाता है, जबकि परमात्मा और अच्छे मूल्यों को प्राथमिकता देने वाला व्यक्ति सही मार्ग पर बना रहता है।
यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो परिश्रम कीजिए, मन की शांति प्राप्त करनी है तो सेवा कीजिए, और यदि सच्चा संतोष प्राप्त करना है तो परमात्मा का स्मरण कीजिए। याद रखिए, वृक्ष अपने फलों से पहचाना जाता है, मनुष्य अपने व्यवहार से पहचाना जाता है और जीवन अपने कर्मों से महान बनता है।
समय बदलता है, परिस्थितियाँ बदलती हैं और लोग भी बदल जाते हैं; लेकिन अच्छे विचार, उत्तम संस्कार और सच्चे संबंधों का मूल्य कभी कम नहीं होता।
इसलिए सकारात्मक सोच रखिए, ईमानदारी से कार्य कीजिए, विनम्रता से व्यवहार कीजिए, परमात्मा पर विश्वास रखिए और जहाँ भी जाएँ, वहाँ प्रेम, सेवा और सद्भावना के फूल खिलाते रहिए।
सुख बाँटने से बढ़ता है, दुःख बाँटने से कम होता है और प्रेम बाँटने से अनेक गुना होकर वापस लौटता है।
– राजेंद्र सिंघ शाहू
प्रोफेशनल इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड
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