ईरान-अमेरिका गतिरोध: ट्रंप के कूटनीतिक कदम और आंतरिक दबाव का विश्लेषण
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के पटल पर ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। हाल ही में आए घटनाक्रमों से यह संकेत मिलता है कि जो डोनाल्ड ट्रंप कुछ समय पहले ईरान को पूरी तरह तबाह करने की धमकियां दे रहे थे, वे अब शांति और समझौते की बात करने लगे हैं। स्रोतों के अनुसार, यह बदलाव किसी स्वेच्छा से अधिक ट्रंप की राजनीतिक और आर्थिक मजबूरियों का परिणाम नजर आता है।
ट्रंप का कूटनीतिक यू-टर्न और ईरान की शर्तें
अमेरिकी प्रशासन अब ईरान के साथ युद्ध को टालने और किसी भी कीमत पर एक डील करने की कोशिश में है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘वाशिंगटन पोस्ट’ जैसे प्रमुख समाचार पत्रों की रिपोर्टों से पता चलता है कि ट्रंप ने ईरान के लिए कुछ नए प्रस्ताव तैयार किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रंप अब ईरान की उन शर्तों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिन्हें पहले खारिज कर दिया गया था। ईरान की मांग थी कि किसी भी परमाणु समझौते (Nuclear Deal) से पहले हॉर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) के मुद्दे पर बातचीत की जाए। अब ट्रंप इस पर सहमत होते दिख रहे हैं और उन्होंने इस चर्चा के लिए 30 दिन का समय दिया है, जिससे यह संभावना बन रही है कि वे हॉर्मुज से नौसैनिक घेराबंदी (Naval Blockade) हटा सकते हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका ईरान पर लगे बरसों पुराने व्यापारिक प्रतिबंधों को हटाने और विभिन्न विदेशी बैंकों में फ्रीज किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को रिलीज करने के लिए भी तैयार हो रहा है। यह ट्रंप प्रशासन की एक बड़ी रियायत मानी जा रही है।

ईरान का बढ़ता आत्मविश्वास
दूसरी ओर, ईरान का रुख काफी कड़ा और आत्मविश्वास से भरा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय और वहां के आधिकारिक मीडिया ‘प्रेस टीवी’ ने स्पष्ट किया है कि बातचीत धमकियों के साये में नहीं हो सकती। उनका तर्क है कि बातचीत ‘नेगोशिएशन’ (negotiation) होनी चाहिए न कि ‘डिक्टेशन’ (dictation)। ईरान ने ट्रंप को अपना ‘लहजा’ ठीक करने की सलाह दी है, जो यह दर्शाता है कि इस समय कूटनीतिक बढ़त ईरान के पास है।
ट्रंप पर दबाव के प्रमुख कारण
स्रोतों में उन कारणों का विस्तार से वर्णन किया गया है जिनकी वजह से ट्रंप इतने दबाव में हैं:
- हॉर्मुज की खाड़ी का संकट: पिछले 68 दिनों से हॉर्मुज की खाड़ी में तेल और गैस की आपूर्ति का मार्ग पूरी तरह बंद है। यह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन गया है क्योंकि इसके कारण तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर वैश्विक और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
- अमेरिकी महंगाई: अमेरिका में घरेलू महंगाई (Household Inflation) इस कदर बढ़ गई है कि लगभग आधे अमेरिकी परिवारों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ने से जनता में भारी नाराजगी है।
- राजनीतिक भविष्य और चुनाव: नवंबर में अमेरिका में मिड-टर्म (मध्यवर्ती) चुनाव होने वाले हैं। रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति खराब बताई जा रही है और ट्रंप को डर है कि यदि वे चुनाव हारते हैं, तो उन पर महाभियोग (Impeachment) चलाया जा सकता है और उनकी सत्ता जा सकती है। उनके अपने समर्थक और ‘वोटर भक्त’ भी महंगाई के कारण नाराज हैं।
- सैन्य विद्रोह की खबरें: सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह है कि अमेरिकी सेना के भीतर भी असंतोष पनप रहा है। कुछ रिपोर्टों में ‘म्यूटनी’ (बगावत) तक की बात कही गई है। अमेरिकी सैनिक अब ईरान के साथ युद्ध नहीं लड़ना चाहते और इसे इजरायल के लिए लड़ी जाने वाली ‘किराए की जंग’ मान रहे हैं। आंतरिक सबोटाज की घटनाओं, जैसे युद्धपोतों में तकनीकी खराबी और आग लगने की खबरों ने ट्रंप की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
चीन का प्रभाव और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन
इस पूरे घटनाक्रम में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। ट्रंप के चीन दौरे से ठीक पहले ईरान को चीन बुलाया जाना एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है। चीन ने अब ईरान को पश्चिम एशिया (West Asia) की सबसे बड़ी क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्वीकार कर लिया है। यह अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वह हमेशा से चीन और ईरान के बीच किसी भी प्रकार के गठबंधन को रोकने की कोशिश करता रहा है।


सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामनेई की वापसी
ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामनेई, जो 28 फरवरी के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, अब तेजी से रिकवर कर रहे हैं। यह खबर अमेरिका और इजरायल के लिए चिंता का विषय है क्योंकि खामनेई को एक ‘कट्टर’ और समझौता न करने वाला नेता माना जाता है। यदि वे पूरी तरह सक्रिय होकर स्वयं निर्णय लेने लगते हैं, तो अमेरिका के लिए समझौता करना और भी कठिन हो सकता है। उनकी जल्द ही कैमरे के सामने आने की संभावना जताई जा रही है, जो दुनिया के लिए उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी।
निष्कर्ष
संक्षेप में, वर्तमान स्थिति में ट्रंप चारों तरफ से घिरे हुए नजर आ रहे हैं। आर्थिक संकट, घरेलू महंगाई, चुनाव का डर और सेना के भीतर का असंतोष उन्हें ईरान के सामने झुकने पर मजबूर कर रहा है। वहीं ईरान, चीन के समर्थन और अपने सुप्रीम लीडर की रिकवरी के साथ, इस कूटनीतिक जंग में खुद को मजबूत स्थिति में देख रहा है। ट्रंप के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी साख बचाते हुए इस युद्ध के जाल से बाहर निकलना है।
