भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा हाल ही में दिए गए एक विस्फोटक साक्षात्कार पर आधारित है। इस विश्लेषण में डॉ. स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भविष्य की राजनीतिक योजनाओं, विशेष रूप से उनके राष्ट्रपति बनने की संभावनाओं और उसके पीछे के छिपे हुए एजेंडे पर प्रकाश डाला है।
राष्ट्रपति पद के लिए मोदी की योजना और संवैधानिक परिवर्तन
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का सबसे प्रमुख दावा यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में स्वयं उम्मीदवार बन सकते हैं।, हालांकि, यह केवल एक पद परिवर्तन नहीं होगा। स्वामी के अनुसार, मोदी जी की योजना भारत में प्रेसिडेंशियल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट (अध्यक्षीय शासन प्रणाली) लागू करने की है, जैसा कि अमेरिका या रूस में प्रचलित है।,
स्वामी का तर्क है कि राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी जी प्रधानमंत्री पद की मौजूदा शक्तियों को ध्वस्त कर देंगे और सारी कार्यकारी शक्तियां राष्ट्रपति के कार्यालय में केंद्रित कर देंगे।, वे इसे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मॉडल से जोड़कर देखते हैं, जिन्होंने लंबे समय तक सत्ता में रहने के लिए व्यवस्था को अपने अनुरूप ढाला। स्वामी के अनुसार, इसके लिए संविधान में बड़े संशोधनों की आवश्यकता होगी, जिसे वे ‘अमेरिकी सिस्टम’ जैसा बनाने की कोशिश मान रहे हैं।

राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के लिए खतरे की घंटी
डॉ. स्वामी ने भविष्यवाणी की है कि यदि मोदी स्वयं राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनते हैं या किसी और को खड़ा करते हैं, तो भाजपा के लिए यह चुनाव जीतना अत्यंत कठिन होगा।, उनके विश्लेषण के अनुसार:
- राजनीतिक अलगाव: भाजपा वर्तमान में पूरे देश में राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ रही है। न केवल विपक्ष, बल्कि भाजपा के सहयोगी दल भी राष्ट्रपति चुनाव में उनके खिलाफ खड़े हो सकते हैं।
- संख्या बल की चुनौती: स्वामी का मानना है कि आज की परिस्थिति में भाजपा के पास वह बहुमत नहीं है जो राष्ट्रपति चुनाव को आसानी से जीत सके। उन्होंने उदाहरण दिया कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में भाजपा का सूपड़ा साफ हो चुका है (15 सीटों से घटकर 1 सीट पर आना), जो इस गिरती लोकप्रियता का संकेत है।,
- सहयोगियों पर निर्भरता: वर्तमान सरकार चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार जैसे सहयोगियों के भरोसे चल रही है, जिन्होंने अपनी शर्तें मनवाकर समर्थन दिया है। स्वामी के अनुसार, ये छोटे-छोटे लोग जिन्हें मंत्री बनाया गया है, वे राष्ट्रपति चुनाव के कठिन समय में पार्टी को नहीं बचा पाएंगे।
विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विफलता के आरोप
डॉ. स्वामी ने मोदी सरकार की विदेश नीति, विशेषकर चीन और अमेरिका के प्रति उनके रुख की तीखी आलोचना की है।,
- चीन का मुद्दा: स्वामी का आरोप है कि चीन ने भारतीय जमीन पर कब्जा कर लिया है, लेकिन प्रधानमंत्री इसे स्वीकार करने के बजाय कह रहे हैं कि कोई आया नहीं, कोई गया नहीं।, उन्होंने दावा किया कि चीन हमारी सीमा के 20 किलोमीटर अंदर तक घुस आया है, लेकिन सरकार ने इसे जनता के सामने आने नहीं दिया।
- अमेरिका के प्रति “झुकाव”: स्वामी ने अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो के भारत दौरे और 5 अरब डॉलर के आयात समझौतों पर सवाल उठाए हैं।, उनका कहना है कि मोदी जी अमेरिका के सामने झुक रहे हैं या ब्लैकमेल हो रहे हैं।, उन्होंने एक पुराना वाकया सुनाया जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और ओबामा के कार्यकाल के दौरान डरे हुए थे, तब उन्होंने स्वामी से मदद मांगी थी।,
- इटली और व्यक्तिगत संबंध: स्वामी ने प्रधानमंत्री की इटली यात्राओं और वहां के नेतृत्व के साथ उनके संबंधों पर भी रहस्यमयी टिप्पणी की है, जिसे वे देशहित के बजाय कुछ और मानते हैं।,
आर्थिक नीतियां और अडानी का मुद्दा
एक अर्थशास्त्री के रूप में डॉ. स्वामी ने देश की आर्थिक स्थिति को गर्त में जाने वाला बताया है। उन्होंने विशेष रूप से अडानी समूह का उल्लेख करते हुए कहा कि अडानी ने भारत में गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के लिए निवेश करने के बजाय, अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। स्वामी का आरोप है कि यह निवेश केवल अपने दोस्त को बचाने और विदेशी कानूनी मामलों से राहत पाने के लिए किया गया है। उन्होंने पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल की आर्थिक सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि मोदी के रहते आर्थिक सुधार संभव नहीं लग रहे हैं।
आरएसएस (RSS) और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र
स्वामी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मोदी जी को दो कार्यकाल पूरे होने के बाद राजनीति से हटने का संकेत दिया था, लेकिन मोदी जी तीसरा कार्यकाल जारी रखने और सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अड़े हुए हैं। उन्होंने भाजपा के भीतर हाँ में हाँ मिलाने (Yes-men) वाली संस्कृति की आलोचना की है।, स्वामी का कहना है कि पार्टी में अब चर्चा या संवाद के लिए कोई जगह नहीं बची है और अधिकांश सदस्य केवल प्रधानमंत्री के आदेशों का पालन कर रहे हैं।,
ऐतिहासिक संदर्भ: इंदिरा गांधी और जयप्रकाश नारायण
साक्षात्कार के अंत में, डॉ. स्वामी ने इंदिरा गांधी के आपातकाल का उदाहरण दिया।, उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी भी बहुत लोकप्रिय थीं, लेकिन उनके अहंकार और गलत नीतियों के कारण जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया था। उन्होंने जयप्रकाश नारायण (JP) के आंदोलन को याद करते हुए कहा कि जब जनता में गुस्सा होता है, तो कोई न कोई बड़ी घटना या आंदोलन सत्ता परिवर्तन का कारण बनता है। वे वर्तमान में कॉकरोच जनता पार्टी (CJI की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर उभरा एक अभियान) और युवाओं के आक्रोश को एक बड़े बदलाव की शुरुआत के रूप में देखते हैं।,
निष्कर्ष
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का यह विश्लेषण स्पष्ट करता है कि उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य अब राष्ट्रपति पद के माध्यम से सत्ता का पूर्ण केंद्रीकरण करना है। हालांकि, गिरती हुई लोकप्रियता, कमजोर आर्थिक स्थिति, चीन के साथ सीमा विवाद और सहयोगियों की अविश्वसनीयता भाजपा के लिए आगामी राष्ट्रपति चुनाव और 2029 के आम चुनाव को एक बड़ी चुनौती बना सकते हैं।,, स्वामी का मानना है कि यदि भाजपा अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करती और नेतृत्व परिवर्तन पर विचार नहीं करती, तो उसे गंभीर चुनावी हार का सामना करना पड़ सकता है।,
