हर भावना को शब्दों की आवश्यकता नहीं होती।
कई बार प्रेम, अपनापन, विश्वास और संवेदना बिना बोले ही एक-दूसरे तक पहुँच जाती है।सन 1983 की बात है। नौकरी के कारण मेरा निवास किनवट तालुका में था। उस समय किनवट घने जंगलों और पिछड़े क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। चारों ओर जंगल, सन्नाटा और साधारण जीवन। मैं एक छोटे से मिट्टी के बने दो कमरों वाले घर में किराये से रहता था। उस समय उस घर का किराया केवल 60 रुपये था।
घर की जमीन भी मिट्टी की थी। अकेले रहने के कारण ना कोई खास सामान था, ना पलंग। बस एक गोदड़ी बिछाकर जमीन पर ही सो जाता था।
उस कमरे की दीवारों के छोटे-छोटे छेदों से तीन इंगलियां बाहर निकलती थीं। वे देखने में बिच्छू जैसी थीं और उनके डंक से इंसान को बहुत दर्द हो सकता था। शुरू में उन्हें देखकर मैं डर जाता था। रात को सोते समय भी मन में डर बना रहता था।
लेकिन धीरे-धीरे मेरे मन में एक अलग ही भावना जागी। मैंने सोचा —
यदि इंसान प्रेम समझ सकता है, तो शायद ये छोटे जीव भी भावना समझ सकते होंगे।
उस दिन से मैं अपने भोजन में से थोड़ा हिस्सा उनके लिये भी रखने लगा। धीरे-धीरे डर समाप्त होने लगा और एक अनोखा रिश्ता बनता गया।
अब जब मैं ड्युटी से घर लौटता, तो वे दीवार के छेदों से बाहर निकल आतीं। ऐसा लगता मानो कोई अपना खुशी से स्वागत कर रहा हो। जब मैं भोजन करने बैठता तो वे पास आकर शांत बैठ जातीं। और जब रात को मैं सो जाता, तो कभी छाती पर, कभी पेट पर छोटे बच्चों की तरह इधर-उधर घूमकर मस्ती करती रहतीं।
सबसे बड़ी बात
इतने वर्षों में उन्होंने मुझे कभी डंक नहीं मारा, कभी नुकसान नहीं पहुँचाया।
यदि कभी कोई मित्र कमरे में आ जाता, तो वे तुरंत दीवारों में जाकर छुप जातीं। जैसे उन्हें भी पहचान हो गई हो कि कौन अपना है और कौन नया।
धीरे-धीरे यह हमारा रोज का नियम बन गया। जंगल के उस एकांत जीवन में वे तीन छोटे जीव मेरे लिये परिवार जैसे बन गये थे।
वहाँ रहकर मैंने जीवन का एक अमूल्य सत्य सीखा
प्रेम की भाषा संसार की सबसे बड़ी भाषा होती है।
जिसे ना पढ़ना पड़ता है, ना बोलना…
उसे केवल दिल से महसूस किया जाता है।
कुछ समय बाद मेरी बदली नांदेड हो गई। मैं किनवट छोड़कर चला आया। आज उस घटना को 40 वर्ष से भी अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उन इंगलियों की याद आज भी मेरे मन में मीठी स्मृति बनकर जीवित है।
आज भी जब वह समय याद आता है, तो मन यही कहता है —
दुनिया में डर से नहीं, प्रेम से जीते जाते हैं दिल।
इंसान हो या कोई छोटा जीव,
जहाँ सच्ची भावना, दया और अपनापन मिलता है, वहाँ हिंसा भी शांत हो जाती है।
इसलिए जीवन में हमेशा प्रेम बाँटिये…
क्योंकि शब्द कभी-कभी धोखा दे सकते हैं,
लेकिन सच्ची भावना कभी झूठ नहीं बोलती।
राजेंद्र सिंघ शाहू
इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड
7700063999
