प्रस्तावना मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री विजय शाह के लिए आने वाले दिन अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों के मामले में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ८ मई को हुई सुनवाई में कोर्ट द्वारा दी गई फटकार और चार सप्ताह की समय सीमा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में हीलाहवाली अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब विजय शाह का मंत्री पद जाना लगभग तय है। घटना की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा मामला? यह पूरा विवाद मई २०२३ का है, जब इंदौर के महू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने एक जनसभा को संबोधित किया था। उस समय आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई की चर्चा हो रही थी। इस ऑपरेशन की ब्रीफिंग के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी और अन्य महिला अधिकारी सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। विजय शाह ने अपने संबोधन में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न केवल अभद्र बल्कि महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध माना गया। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि तुमने हमारी बहनों को अगर विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि तुम्हारी जाति की समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर बदला लिया जा सकता है। इन शब्दों के कारण न केवल विपक्षी दलों ने बल्कि आम जनता और भाजपा से जुड़े कुछ वर्गों ने भी इसे बेहद नागवार और अनुचित करार दिया था। न्यायिक प्रक्रिया और सरकार की देरी इस विवाद के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया था। हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया था कि ऐसी टिप्पणियां किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं, जिसके बाद सरकार को एफआईआर (FIR) दर्ज करनी पड़ी थी। हालांकि, मामला तब आगे फंस गया जब मंत्री के खिलाफ अभियोजन (Prosecution) चलाने की अनुमति देने में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा देरी की जाने लगी। सरकार की इस हीलाहवाली के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। विजय शाह ने भी राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां उन्हें कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। सुप्रीम कोर्ट की ‘फटकार’ और इनफ इज इनफ (Enough is Enough) ८ मई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार और मंत्री के आचरण पर बेहद सख्त टिप्पणी की। जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री का बचाव करते हुए तर्क दिया कि शायद उनके बयान को गलत समझा गया है और वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे, तो कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एक अनुभवी राजनेता के तौर पर मंत्री को अच्छी तरह पता होना चाहिए कि किसी महिला अधिकारी की प्रशंसा कैसे की जाती है। कोर्ट ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण नहीं बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जस्टिस सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा इनफ इज इनफ” (बस बहुत हुआ), अब हमारे आदेश का पालन कीजिए। कोर्ट ने अब एसआईटी (SIT) की स्टेटस रिपोर्ट और अभियोजन की स्वीकृति के मामले में सरकार को चार सप्ताह का अंतिम समय दिया है। विजय शाह का विवादों से पुराना नाता यह पहली बार नहीं है जब विजय शाह अपने बयानों के कारण संकट में फंसे हों। स्रोतों के अनुसार, उनका विवादों से गहरा और पुराना रिश्ता रहा है: २०१३ का इस्तीफा: विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके कारण उन्हें अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। अन्य विवाद: उन्होंने राहुल गांधी के अविवाहित होने पर टिप्पणी की थी और अभिनेत्री विद्या बालन द्वारा रात में मिलने से मना करने पर उनकी फिल्म की शूटिंग रुकवाने जैसा विवाद भी उनके नाम रहा है। लाड़ली बहना विवाद: २०२५ में उन्होंने लाड़ली बहना योजना की लाभार्थियों को कथित तौर पर धमकी दी थी, जिसका वीडियो काफी वायरल हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी टिप्पणी में उल्लेख किया कि मंत्री को इस तरह के कमेंट करने की ‘आदत’ है। राजनीतिक मायने और संभावित परिणाम वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी नारी शक्ति और ‘महिला आरक्षण’ जैसे मुद्दों पर विपक्ष को घेर रही है। ऐसे में अपनी ही सरकार के एक मंत्री द्वारा एक वरिष्ठ महिला सैन्य अधिकारी के प्रति ऐसी भाषा का उपयोग करना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। यदि मध्य प्रदेश सरकार अगले चार हफ्तों में अभियोजन की स्वीकृति दे देती है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत विजय शाह को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैये के बाद अब मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के पास बचाव का कोई रास्ता नहीं बचा है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। कर्नल सोफिया कुरैशी के सम्मान से जुड़ा यह मामला अब केवल एक बयानबाजी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह विजय शाह के राजनीतिक भविष्य और सरकार की ‘नारी सम्मान’ के प्रति गंभीरता की परीक्षा बन गया है। चार सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई यह तय करेगी कि विजय शाह की कुर्सी बचेगी या उन्हें एक बार फिर अपने बयानों की कीमत चुकानी पड़ेगी। Kanthak Suryatal Post Views: 550 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation तामिळनाडूचा सत्तासंघर्ष: राहुल गांधींची ‘चाणक्य’ नीती आणि सुपरस्टार विजयचा राज्याभिषेक पश्चिम बंगाल मध्ये हिंसा लवकर थांबणार नाही ….