लेकिन अगर आँख के अंदर कुछ चला जाए
तो वही आँख उसे नहीं देख पाती।
मनुष्य दूसरों की बुराइयाँ तुरंत देख लेता है,
पर अपने भीतर बैठी बुराइयाँ
उसे कभी दिखाई नहीं देतीं।
आज यही स्थिति
महानगरपालिका चुनाव में दिखाई दे रही है।
लोगों को सब कुछ दिख रहा है
कौन क्या कर रहा है,
कौन क्या बोल रहा है,
कौन कितना योग्य है।
फिर भी
कहीं रिश्तेदारी,
कहीं पैसे का लालच,
कहीं अंधभक्ति,
तो कहीं दबाव तंत्र
इन कारणों से मतदाता
असमंजस की स्थिति में फँसकर
अपनी सबसे बड़ी ताकत
वोट का गलत इस्तेमाल कर सकता है।
यह वही वोट है
जो सही दिशा में गया
तो वार्ड का भविष्य बदल सकता है,
और गलत दिशा में गया
तो पाँच साल का अंधकार तय है।
आज सबसे ज़रूरी है कि
ना जात देखी जाए,
ना धर्म,
ना रिश्तेदारी,
ना किसी पार्टी या नेता के प्रति
अंधी वफादारी।
बल्कि
अपनी अंतरात्मा से सवाल किया जाए
क्या यह उम्मीदवार
मेरे वार्ड के लिए खड़ा रहेगा?
क्या यह दबाव में झुके बिना
जनता की आवाज़ बन सकेगा?
क्योंकि आज का कटु सत्य यह है कि
कोई भी राजनीतिक पार्टी हो
या कोई भी बड़ा नेता
सत्ता के लिए
साम, दाम, दंड, भेद
हर नीति अपनाई जा रही है,
और वह भी
बहुत निचले स्तर तक जाकर।
यह प्रवृत्ति
आने वाले समय के लिए
बेहद दुःखद और खतरनाक है।
इसलिए विवेकशील सोच अनिवार्य है।
यह भी सच है कि
कोई व्यक्ति बहुत नेक,
शांत और अच्छे विचारों वाला हो सकता है,
पर अगर उसमें
अपने ही नेता के सामने
सच बोलने की हिम्मत नहीं है,
तो ऐसा नगरसेवक
जनता के किसी काम का नहीं।
वहीं दूसरी ओर
कोई व्यक्ति थोड़ा बदनाम भी हो सकता है,
पर अगर वह
अपने एरिया के विकास के लिए
किसी से भी भिड़ने की हिम्मत रखता है,
जनता की समस्या को
अपनी समस्या समझता है
और अपने काम के प्रति
ईमानदार वफादार है
तो ऐसे उम्मीदवार को
नगरसेवक बनाना
हमारे, हमारे वार्ड
और हमारे शहर के हित में हो सकता है।
याद रखिए
वोट सुंदर चेहरे को नहीं,
मजबूत इरादों को दीजिए।
वोट मीठी बातों को नहीं,
काम करने की हिम्मत को दीजिए।
क्योंकि सही वोट
आज का फैसला नहीं,
कल का भविष्य तय करता है।
– राजेंद्र सिंघ शाहू
इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड
7700063999
