कभी अमरीका झुकता है तुरंत धोका देकर हमला करता है;ईरान भी पीछे नहीं
मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है और इस बार चिंगारी सीधे तौर पर दुनिया की दो बड़ी ताकतों अमेरिका और ईरान के बीच सुलग उठी है। पिछले कुछ घंटों के घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान और अमेरिका के बीच अब केवल जुबानी जंग नहीं, बल्कि एक भयानक सैन्य संघर्ष शुरू हो चुका है। टॉमहॉक मिसाइलों की गूँज, F-35 लड़ाकू विमानों की गर्जना और ड्रोन हमलों ने इस क्षेत्र की शांति को पूरी तरह से भंग कर दिया है। यह संघर्ष न केवल इन दो देशों के लिए, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।
युद्ध की शुरुआत: अपाचे हेलीकॉप्टर और शाहिद-136 ड्रोन इस ताज़ा संघर्ष की शुरुआत हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास हुई एक महत्वपूर्ण घटना से हुई। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को ईरान द्वारा मार गिराया गया। शुरुआत में इसे एक तकनीकी खराबी या हादसा माना जा रहा था, लेकिन बाद में यह पुष्ट हुआ कि ईरान ने अपने घातक शाहिद 136 (Shahed 136) ड्रोन का इस्तेमाल करके इस हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया था।
डोनाल्ड ट्रम्प ने इस घटना को अमेरिका पर सीधा हमला करार दिया और रात को ही बयान जारी किया कि इस गुस्ताखी का कड़ा बदला लिया जाएगा। इसी बयान के कुछ घंटों बाद, अमेरिकी सेना ने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देना शुरू कर दिया।
अमेरिका की भीषण जवाबी कार्रवाई: 10 ठिकानों पर प्रहार अमेरिकी सेना ने रात करीब 3:00 बजे ईरान के खिलाफ चौतरफा हमला शुरू किया। यह कोई सीमित हमला नहीं था, बल्कि ईरान की सैन्य कमर तोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के कम से कम 10 महत्वपूर्ण ठिकानों पर एक साथ हमले किए। इन हमलों में टॉमहॉक (Tomahawk) मिसाइलों और F-35 लड़ाकू विमानों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया।
हमले के प्रमुख केंद्र निम्नलिखित थे:
- बंदर अब्बास: ईरान का एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह।
- केशुम (Qeshm) आइलैंड: यहाँ ईरान के कई सैन्य ठिकाने और रडार सिस्टम मौजूद हैं।
- सिरीक (Sirik): यहाँ संचार केंद्रों को निशाना बनाया गया।
- जास्क (Jask) आइलैंड: यहाँ मिसाइल लॉन्च पैड्स को ध्वस्त करने की कोशिश की गई।
- हॉर्मुज़ के नजदीकी द्वीप: यहाँ भी भारी बमबारी की गई।
अमेरिकी हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के रडार सिस्टम, टेलीकम्युनिकेशन सेंटर और मिसाइल लॉन्च पैड्स को नष्ट करना था। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान के उस नए मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी निशाना बनाने की कोशिश की, जिसने पिछले कुछ समय से अमेरिकी और इजरायली जेट्स तथा ड्रोन्स के लिए बड़ी चुनौती पेश की थी।
विवादास्पद निशाना: सिरीक में वाटर टैंक पर हमला युद्ध के बीच एक ऐसी घटना भी सामने आई जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, सिरीक आइलैंड पर हमले के दौरान ईरान के पीने के पानी के वाटर टैंक्स को भी निशाना बनाया गया। सूत्रों का मानना है कि यह घटना इस जंग को और अधिक हिंसक और व्यक्तिगत बना सकती है, क्योंकि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध अपराधों की श्रेणी में आता है।

ईरान का पलटवार: बहरीन में फिफ्थ फ्लीट पर हमला ईरान ने इन हमलों के बाद चुप बैठने के बजाय तुरंत और आक्रामक पलटवार किया है। ईरान की सेना (IRGC) ने घोषणा की है कि किसी भी हमले का करारा और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। ताजा खबरों के मुताबिक, ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) को अपना निशाना बनाया है। बहरीन पर ईरान के इस हमले ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल अपनी रक्षा नहीं करेगा, बल्कि क्षेत्र में मौजूद हर अमेरिकी बेस को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्शी (Abbas Araghchi) ने कड़े शब्दों में कहा है कि ईरान अपनी सीमाओं के भीतर या उसके आसपास किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका शांति चाहता है, तो उसे ईरान की सीमाओं से दूर जाना होगा।
राजनैतिक दांव-पेंच और डोनाल्ड ट्रम्प का रुख इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनैतिक बयानबाजी भी चरम पर है। डोनाल्ड ट्रम्प बार-बार यह दावा कर रहे थे कि ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर कोई बड़ी डील होने वाली है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को पूरी तरह से “झूठ” करार दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत का नाटक कर रहा है और दूसरी तरफ ‘धोखे’ से हमले कर रहा है। ईरान की नजर में अमेरिका की किसी भी बात पर अब विश्वास नहीं किया जा सकता।
पूरे मिडल ईस्ट में हाई अलर्ट इस संघर्ष ने केवल ईरान और अमेरिका को ही नहीं, बल्कि पूरे अरब जगत को खतरे में डाल दिया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यह सीमित स्ट्राइक का दौर खत्म हो चुका है और वह इसे एक पूर्ण युद्ध की शुरुआत मान रहा है। इसके परिणाम स्वरूप:
- सऊदी अरब, यूएई (UAE), कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
- कई जगहों पर सायरन बजने की खबरें आई हैं और डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया गया है।
- इजराइल में भी भारी अलर्ट जारी किया गया है। यहाँ अमेरिका के पैट्रियट (Patriot) और थाड (THAAD) मिसाइल डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है, क्योंकि ईरान की ओर से इजराइल पर बड़े हमले की आशंका है।

यहाँ यह ध्यान देना आवश्यक है कि ऐतिहासिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच संबंध १९७९ की इस्लामी क्रांति के बाद से ही तनावपूर्ण रहे हैं। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग २०% हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में युद्ध का अर्थ है वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल और आर्थिक मंदी का खतरा।
निष्कर्ष वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले कुछ घंटे और दिन बेहद निर्णायक होने वाले हैं। मिडल ईस्ट एक बार फिर सुलग रहा है और हॉर्मुज़ से लेकर बहरीन तक फैली यह जंग एक महायुद्ध का रूप ले सकती है। अमेरिका का दावा है कि उसने हमले बंद कर दिए हैं, लेकिन ईरान के तेवर बताते हैं कि वह इस अपमान का बदला लिए बिना पीछे नहीं हटेगा। यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो इसमें इजराइल और अन्य अरब देशों का शामिल होना तय है, जो विश्व शांति के लिए एक बड़ा आघात होगा। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए इस आग को बुझाया जा सकता है या फिर मानवता एक और विनाशकारी युद्ध की गवाह बनेगी।

