आज के समय में पैसा कमाना कठिन नहीं रहा… लेकिन पैसे को सही दिशा देना सबसे कठिन काम बन गया है। समाज में आज एक नई होड़ दिखाई दे रही है — दिखावे की होड़, बड़प्पन की होड़ और दूसरों से बड़ा दिखने की होड़। लोग लाखों रुपये केवल नाम, प्रसिद्धि और कुछ घंटों की वाहवाही के लिए खर्च कर देते हैं। शादी हो, धार्मिक समागम हो, जन्मदिन हो या कोई सत्कार समारोह… कई बार आवश्यकता से ज्यादा पैसा केवल स्वागत, सजावट, दिखावे और शान में खर्च कर दिया जाता है। कुछ समय के लिए तालियाँ जरूर मिल जाती हैं, लेकिन आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए क्या बचता है…? यह प्रश्न बहुत कम लोग स्वयं से पूछते हैं। आज की युवा पीढ़ी को जितनी आवश्यकता नहीं होती, उससे कहीं ज्यादा साधन हम उपलब्ध करा रहे हैं। मोबाईल, गाड़ियाँ, फैशन और सुख-सुविधाएँ तो दे रहे हैं… परंतु संस्कार, जिम्मेदारी, मेहनत, आत्मनिर्भरता और धर्म से जुड़ाव देना भूलते जा रहे हैं। यही कारण है कि साधन बढ़ रहे हैं… लेकिन मन की शांति, परिवार की एकता और जीवन के संस्कार कम होते जा रहे हैं। याद रखिए — धन का सही उपयोग केवल खर्च करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना है। यदि वही पैसा बच्चों की शिक्षा, हुनर, व्यवसाय, अच्छे संस्कार, धर्म ज्ञान और आत्मनिर्भरता पर लगाया जाए… तो वही धन आने वाले कई वर्षों तक परिवार और समाज को मजबूत बना सकता है। धार्मिक कार्यक्रमों का वास्तविक उद्देश्य केवल भीड़ और दिखावा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को धर्म, मानवता, सेवा और अच्छे विचारों से जोड़ना होना चाहिए। क्योंकि — जो धन केवल दिखावे में खर्च होता है वह कुछ समय की वाहवाही देता है, लेकिन जो धन संस्कारों और भविष्य पर लगाया जाता है वह कई पीढ़ियों को उज्ज्वल बना देता है। इसलिए समय रहते सोच बदलिए… दिखावे से ज्यादा विकास पर खर्च कीजिए… क्षणिक प्रसिद्धि से ज्यादा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर ध्यान दीजिए… क्योंकि वही सबसे बड़ी दौलत है। – राजेंद्र सिंघ शाहू इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड 7700063999 Kanthak Suryatal Post Views: 805 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation राष्ट्रीय डेंग्यू दिवस १६ मे गुरूद्वारा एरिया, अबचलनगर तथा टावरझोन अंतर्गत बार-बार बिजली बंद होने के विषय में एक वास्तविक और संतुलित विचार