अगर आप घास से पूछेंगे तो हिरण राक्षस है… और शेर रक्षक है। लेकिन अगर आप हिरण से पूछेंगे तो शेर राक्षस है… और घास जीवन है। सच यह है कि इस संसार में मूल रूप से न कुछ अच्छा है, न कुछ बुरा। परमात्मा ने केवल सृष्टि की रचना की है, और जो ईश्वर की रचना है वह गलत हो ही नहीं सकती। प्रकृति अपने नियमों से चलती है हर घटना, हर परिवर्तन एक निश्चित व्यवस्था का हिस्सा है। अच्छा और बुरा वस्तुओं में नहीं होता, वह हमारी सोच में जन्म लेता है। हमें जितना ज्ञान मिला है, हम उतनी ही समझ से किसी बात को सही या गलत ठहराते हैं। इसीलिए सच यह है कि अच्छा-बुरा परिस्थितियों में नहीं, हमारे देखने के ढंग में होता है। एक साधारण इंसान के लिए कुछ हज़ार रुपये ही बहुत होते हैं, क्योंकि वही उसकी ज़रूरतें पूरी करते हैं। वहीं किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के लिए प्रोटोकॉल, सुरक्षा और व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च होना भी आवश्यक होता है। दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं, क्योंकि दोनों का संसार और ज़िम्मेदारियाँ अलग-अलग हैं। इतना ही नहीं… हर इंसान जो भी कार्य करता है, वह भी उसी परमात्मा की मर्जी और व्यवस्था के अंतर्गत होता है। हम खुद को कर्ता समझते हैं, पर वास्तव में हम केवल माध्यम होते हैं, कर्ता वही सर्वोच्च शक्ति होती है। मनुष्य अपनी सीमित समझ से हर बात को अच्छा या बुरा कह देता है, जबकि सृष्टि की दृष्टि से वह केवल एक प्रक्रिया होती है। इसलिए किसी को दोष देने से पहले नज़रिया बदलना सीखिए। जब नज़रिया बदलता है, तो शिकायत घटती है और समझ बढ़ती है। जब समझ बढ़ती है, तो मन हल्का होता है और जीवन शांत हो जाता है। यही जीवन का सत्य है परिस्थितियाँ न अच्छी होती हैं, न बुरी; अच्छा या बुरा बनता है हमारे देखने के ढंग से। राजेंद्र सिंघ शाहू इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड 7700063999 Kanthak Suryatal Post Views: 595 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation 25 जानेवारी राष्ट्रीय मतदार दिन आणि भारतीय नागरिकांचे कर्तव्य एसटी मेकॅनिक गुणवंत एच.मिसलवाड हे एक बहुआयामी व्यक्तीमत्व ; 31 जानेवारी 2026 सेवापुर्तीच्या निमित्ताने