महाराष्ट्र सरकार, जनप्रतिनिधियों, नांदेड की जनता, पत्रकार भाई एवं देशवासियों से सिक्ख समाज की भावनात्मक एवं न्यायपूर्ण अपील

मारी सरकार,किसी नेता,किसी समाज या किसी राजकीय पार्टी के विरुद्ध लढाई नहीं है
आज हम किसी विशेष सुविधा, आरक्षण, अनुदान या सत्ता की माँग लेकर नहीं आए हैं। केवल आज तक शीख समाज पर हुये और हो रहे अन्याय दुजा भाव बता कर उसे दुर करने की विनंती करने के लिये हम आये है

हम केवल न्याय, सम्मान, धार्मिक स्वायत्तता और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा की माँग कर रहे हैं। सिख समाज ने हमेशा सेवा को धर्म और मानवता को अपना कर्म माना है।

नांदेड़ जिले में आज लगभग 20 से 25 स्थानों पर 24 घंटे अखंड लंगर चल रहे हैं। यहाँ श्रद्धालुओं के साथ-साथ  स्थानिक गरीब, मजदूर, विद्यार्थी, मरीजों के परिजन और हर ज़रूरतमंद व्यक्ति को प्रतिदिन निःशुल्क भोजन कराया जाता है। कोरोना महामारी, भूकंप, बाढ़, सूखा तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय सिक्ख समाज ने बिना किसी भेदभाव के लंगर, राशन, दवाइयाँ, रक्तदान, कपड़े तथा हर प्रकार की निःस्वार्थ सेवा की है।

नांदेड़ में होने वाले धार्मिक समागमों, खेल प्रतियोगिताओं, सरकारी कार्यक्रमों तथा देश-विदेश से आने वाले अतिथियों और वीआईपी व्यक्तियों के स्वागत, रहने, खाने-पीने एवं सेवा की व्यवस्था में भी सिक्ख समाज सदैव अग्रणी रहा है। नांदेड़ के विकास के लिए गुरुद्वारा बोर्ड तथा अनेक सिक्ख परिवारों ने अपनी करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि जनहित में उपलब्ध कराई। इन्हीं भूमियों पर गार्डन, स्टेडियम , मार्केट,टेलीफोन भवन,एन टी सी मील,अस्पताल, महावितरण के सबस्टेशन,सड़कें, रेलवे तथा अन्य सार्वजनिक विकास कार्य हुए।

समाज की अपेक्षा है कि जिन उद्देश्यों के लिए गुरुद्वारा बोर्ड की भूमि दी गई थी, उन भूमियों का उपयोग उसी मूल उद्देश्य और जनहित की भावना के अनुरूप किया जाए तथा जहाँ आवश्यकता हो वहाँ इसकी निष्पक्ष समीक्षा की जाए। समाज का यह भी कहना है कि गुरुद्वारा बोर्ड की कुछ भूमियों पर विभिन्न आरक्षणों एवं अन्य कारणों से यात्री निवास, नए मार्केट, स्कूल तथा समाजहित की योजनाओं के विकास में कठिनाइयाँ उत्पन्न हुई हैं। सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय ले।

कोरोना काल में समाज का कहना है कि अनेक निर्दोष लोगों पर मामले दर्ज हुए, कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक कड़े प्रतिबंध लगाए गए, जिससे अनेक परिवारों को मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इन मामलों की न्यायपूर्ण समीक्षा की जाए। समाज की भावना है कि कुछ अवसरों पर सिक्ख श्रद्धालुओं से उनकी कृपाणे घर में घुस कर    ले ली गई। कृपाण सिक्ख धर्म की धार्मिक पहचान एवं भारतीय संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है। सरकार एवं प्रशासन इस धार्मिक अधिकार का पूरा सम्मान सुनिश्चित करे।

लगभग पच्चीस वर्षों से सचखंड श्री हज़ूर साहिब गुरुद्वारा बोर्ड पर सरकारी प्रशासक कार्यरत है। समाज का मानना है कि अब धार्मिक स्वायत्तता का सम्मान करते हुए स्थायी व्यवस्था स्थापित की जाए। कलम 11 में संशोधन कर सरकार लोकतंत्र से अध्यक्ष चुनने का अधिकार छीन लिया है और अपना चेअरमन भेज कर अल्पसंख्याक सिक्ख समाज के ऐतिहासिक गुरुद्वारा में दखल अंदाजी कर रहे है
सिक्ख समाज में पंजप्यारे साहीबान का हुकम सर्वोच्च रहता है और उस में हजुर साहीब के पंजप्यारे साहीबान के आदेश का पुरे सिक्ख जगत में अलग ही महत्व दीया हुआ है और संचखड गुरूद्वारे के पंजप्यारे साहीबान का हुकुमनामा है 1956 कायदे को यथावत रखे इस का निवेदन महाराष्ट्र सरकार को महसूल मंत्री को सौपां गया है इसे भुलना नहीं चाहिए!!!
सिक्ख समाज की प्रमुख माँगें

1. वर्ष 1956 का गुरुद्वारा अधिनियम यथावत रखा जाए।

2. धारा 11 में किए गए संशोधन को तत्काल रद्द किया जाए तथा गुरुद्वारा बोर्ड के सदस्यों को पहले की तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अपने अध्यक्ष का चुनाव करने का अधिकार पुनः बहाल किया जाए।

3. गुरुद्वारा बोर्ड से संबंधित कोई भी कानून, नियम या निर्णय लेने से पहले केवल और केवल नांदेड़ के पंज प्यारे साहिबान एवं मराठवाड़ा के सिक्ख समाज से संवाद किया जाए।

4. श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी इंजीनियरिंग कॉलेज के नियामक मंडल में केवल एक संस्था तक प्रतिनिधित्व सीमित न रखा जाए, बल्कि योग्य सिक्ख समाज के अन्य व्यक्तियों को भी सदस्य तथा अध्यक्ष बनने का समान अवसर दिया जाए।

5. जिला नियोजन समिति, जिला विकास आराखडा समिति, जिला योजना समिति, स्वीकृत सदस्य (Nominated Member) तथा अन्य सरकारी एवं अर्ध-सरकारी समितियों और संस्थाओं में योग्य सिक्ख समाज के प्रतिनिधियों को न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व दिया जाए। जो आज तक इस की उपेक्षा की गयी है

6. गुरतागद्दी समारोह के दौरान विस्थापित परिवारों एवं व्यापारियों को दिए गए सभी लिखित आश्वासनों को शीघ्र पूरा किया जाए। अबचलनगर में बसाये विस्थापित परिवारों को मुलभूत सुविधा उपलब्ध करायी जाये,आने वाले यात्री ओं को सुख सुविधा उपलब्ध कराई जाये
7) गुरूद्वारा बोर्ड की जमीने जिस उद्देश के लिये दी गयी है उसे उसी उद्देश से जनता को मोफत सुविधा उपलब्ध कराई जाये अगर ऐसे करने में महानगरपालिका या शासन को कोई तकलिफ है तो वह जमीने गुरुद्वारा बोर्ड को वापस की जाये गुरूद्वारा बोर्ड इसे जनता की सेवा में अच्छी तरह पेश करगें ऐसी भी सिक्ख समाज की भावना है
हम संघर्ष नहीं चाहते…

हम टकराव नहीं चाहते…

हम संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं…

लेकिन अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना हमारी परंपरा और हमारा कर्तव्य है। महाराष्ट्र सरकार से हमारी विनम्र अपील है—

सिक्ख समाज की भावनाओं का सम्मान कीजिए। दिए गए आश्वासनों को पूरा कीजिए। धार्मिक स्वायत्तता की रक्षा कीजिए। और जिस समाज ने हमेशा सेवा की है, उसे न्याय और सम्मान दीजिए।

सेवा हमारी पहचान है, न्याय हमारा अधिकार है और धार्मिक स्वायत्तता हमारा स्वाभिमान है।
नांदेड तथा देश विदेश के सिक्ख संगत से अपिल है हजुर साहब की संगत तथा गुरुद्वारे को उचीत न्याय दीलाने के लिये हमारा साथ दे, नांदेड के पत्रकार तथा सभी धर्म के नागरिकों से नम्र निवेदन है नांदेड के विकास के  लिये तथा नांदेड के अल्पसंख्याक सिक्ख समाज का हक्क दीलाने के लिये आप सभी सिक्ख समाज के साथ खडे रह कर सिक्ख समाज को न्याय दीलाने हेतू हमारे साथ आकर आवाज उठाये
बोले सो निहाल… सत श्री अकाल।

– राजेंद्र सिंघ शाहू
प्रोफेशनल इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर, नांदेड़
मो. 7700063999

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