चुनाव दो चरणों में होते हैं…
पहले चरण में
वो आपके चरणों में होते हैं
मुस्कान, वादे और हाथ जोड़कर।
दूसरे चरण में
आप उनके चरणों में होते हैं
समस्या, फरियाद और इंतज़ार लेकर।
अब तय आपको करना है…
क्या आप दूसरे चरण में जाना चाहते हैं?
सोच-समझकर वोट दीजिए
पैसे के लालच में नहीं,
रिश्तेदारी के दबाव में नहीं,
किसी डर या मजबूरी में नहीं।
ऐसा नगरसेवक चुनिए
जो सिर्फ़ चुनाव तक आपके चरणों में न रहे,
बल्कि चुनाव के बाद भी
आपके साथ खड़ा रहे।
क्योंकि गलत नगरसेवक का मतलब है
टूटे रास्ते,
गंदगी,
बिमारियाँ,अंधेर में चलना
और हर दिन जान जोखिम में डालकर
ट्रैफिक और खराब सड़कों से गुजरना।
अगर वार्ड नहीं बदला
तो तकलीफ़ें बढ़ेंगी,
अगर सही सेवक चुना
तो समस्याएँ घटेंगी।
याद रखिए
एक गलत फैसला
पाँच साल की मजबूरी बन जाता है,
और हर समस्या के साथ
आपको उनके चरणों में
चक्कर काटने पड़ते हैं।
अपना कीमती वोट मत बेचिए।
यह सिर्फ़ वोट नहीं,
आपके स्वास्थ्य की सुरक्षा है,
आपके परिवार की सलामती है,
आपके बच्चों का भविष्य है।
जनता जागेगी — तभी वार्ड बदलेगा।
वार्ड बदलेगा — तभी शहर बदलेगा।
सोचिए… समझिए…
और फिर सही सेवक को चुनिए।
राजेंद्र सिंघ शाहू
इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड
7700063999
