बेचारा वह नहीं होता, जिसके जीवन में परेशानियाँ हैं… बेचारा वह होता है, जो परेशानियों के सामने अपनी हिम्मत हारकर खुद को असहाय मान लेता है।जिंदगी में हर किसी के हिस्से में संघर्ष आता है। किसी के पास पैसा कम होता है, किसी के पास साधन कम होते हैं, किसी के अपने साथ नहीं होते… लेकिन जब तक हौसला, मेहनत, बुद्धि और समाधान खोजने की इच्छा हमारे अंदर जिंदा है, तब तक हम बेबस नहीं हैं। मुश्किल समय में किसी का सहारा लेना कमजोरी नहीं, लेकिन हमेशा दूसरों की दया का इंतजार करना अपनी ताकद को भूल जाना है। अपने आँसू खुद पोंछना सीखिए, अपनी गलतियों से सीखिए, अपनी कमियों को अपनी ताकद बनाइए और हर समस्या के सामने एक रास्ता खोजने का प्रयास कीजिए। याद रखिए— परिस्थितियाँ हमें रोक सकती हैं, थोड़ा झुका सकती हैं, हमारी परीक्षा ले सकती हैं… लेकिन हमें तोड़ने की ताकद तभी पाती हैं, जब हम खुद हार मान लेते हैं। इसलिए चाहे उम्र कोई भी हो, हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, दिल से एक बात हमेशा कहिए— “मैं बेचारा नहीं हूँ… मैं संघर्ष कर रहा हूँ। मैं असहाय नहीं हूँ… मैं समाधान खोज रहा हूँ। मैं कमजोर नहीं हूँ… मैं अपनी ताकद को फिर से पहचान रहा हूँ।” क्योंकि जिंदगी में सबसे बड़ी गरीबी साधनों की नहीं, हिम्मत हार जाने की होती है। खुद पर विश्वास रखिए, मेहनत करते रहिए और समाधान खोजते रहिए। जिस दिन इंसान खुद को बेचारा समझना छोड़ देता है, उसी दिन उसके अंदर का योद्धा जाग जाता है। राजेंद्र सिंघ शाहू इलेक्ट्रिकल ट्रेनर नांदेड 7700063999 Kanthak Suryatal Post Views: 545 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation २१ लाखांपेक्षा अधिक मतदारांचा शोध… बाबासाहेबांनी दिलेल्या २२ प्रतिज्ञांचा अन्वयार्थ : भाग एक