जैसे ही मार्को रूबियो भारत पहुंचीं और उन्होंने अपने आगमन का ट्वीट किया, मुंबई स्थित ईरानी दूतावास (काउंसलेट) ने उन पर हिंदी में एक बड़ा तंज कसा। रूबियो ने लिखा था कि वह भारत की शानदार यात्रा के लिए उत्सुक हैं, जिसके जवाब में ईरानी दूतावास ने रीट्वीट करते हुए लिखा, “थोड़ा सीख लो यार, सभ्यता का क्रैश कोर्स फ्री में मिल जाएगा”। यह कटाक्ष दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस पुराने बयान का जवाब माना जा रहा है जिसमें उन्होंने ईरान को धमकी दी थी कि यदि वह शांति समझौते और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए राजी नहीं हुआ, तो पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा। ईरान ने इसी सभ्यता शब्द को पकड़कर रूबियो का मजाक उड़ाया कि वे भारत आकर सभ्यता सीखें। रूबियो की भारत यात्रा के प्रमुख पड़ाव मार्को रूबियो की यह चार दिवसीय यात्रा (23 से 26 मई) कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है: कोलकाता आगमन: उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की, जहां 14 साल बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का आगमन हुआ है (इससे पहले 2012 में हिलेरी क्लिंटन आई थीं)। मानवीय सेवा का दौरा: कोलकाता में उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मुख्यालय और ‘निर्मला शिशु भवन’ का दौरा किया। द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ता: रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है और उनका क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेना भी निर्धारित है। अन्य कार्यक्रम: उनकी यात्रा में दिल्ली के अलावा आगरा और जयपुर का दौरा भी शामिल है, जहाँ ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा संवाद पर चर्चा होनी है। अमेरिका-ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति ईरान और अमेरिका के बीच संबंध युद्ध के मुहाने पर हैं। पिछले दो महीनों से जारी तनाव और छिटपुट हमलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है: ट्रंप की चेतावनी: यदि शांति वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती, तो ट्रंप ईरान पर नए और भीषण हमले करने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका को नुकसान: स्रोतों के अनुसार, अमेरिका को इस युद्ध में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उसके F-35 विमान और ऊँचाई पर उड़ने वाले टोही विमान गिराए गए हैं। साथ ही, अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में ट्रंप के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है और उनकी लोकप्रियता न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। ईरान की शर्तें: ईरान किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है जब तक कि उसे युद्ध का हर्जाना न मिले, प्रतिबंध न हटाए जाएं और उसके यूरेनियम संवर्धन व हॉर्मुज पर नियंत्रण के अधिकार को मान्यता न दी जाए। भारत की रणनीतिक दुविधा भारत इस समय एक कठिन कूटनीतिक स्थिति में है। एक तरफ वह अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुराने सहयोगियों के साथ संबंध पटरी से उतरते दिख रहे हैं: इजरायल को परोक्ष समर्थन: इटली में पकड़े गए भारतीय जहाजों, जिनमें मिलिट्री ग्रेड का स्टील था, से यह संकेत मिलता है कि भारत परोक्ष रूप से इजरायल और अमेरिका की मदद कर रहा है। भविष्य की चुनौती: यदि भारत खुलकर अमेरिका-इजरायल खेमे में आता है, तो उसे रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों के गठबंधन का सामना करना पड़ सकता है। निष्कर्ष: मार्को रूबियो की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईरान के साथ चल रहे वैश्विक तनाव और भारत की भविष्य की विदेश नीति की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ है। क्या आप चाहेंगे कि मैं इस विषय पर आपके अध्ययन के लिए कुछ फ्लैशकार्ड या एक क्विज़ तैयार करूँ? इससे आपको इन कूटनीतिक बारीकियों को याद रखने में मदद मिलेगी। Kanthak Suryatal Post Views: 539 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation नांदेड अभिवक्ता संघातर्फे न्यायिक अधिकाऱ्यांचा हृदयस्पर्शी निरोप समारंभ संपन्न: न्यायाधीश आणि वकील यांच्यातील सुसंवादावर मान्यवरांचा भर भदंत पंय्याबोधी थेरो यांना छ. राजर्षी शाहू महाराज समाजभूषण पुरस्कार जाहीर