वे इतिहास बन जाते हैं…
और नांदेड में हुआ “हिंद दी चादर समागम” ऐसा ही एक पावन इतिहास बन गया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री मा. देवेंद्र फडणवीस जी की संकल्पना, अल्पसंख्याक विभाग, धर्म जागरण समिती, गुरूद्वारा बोर्ड के सहयोग से तथा पंजप्यारे साहिबान के आशीर्वाद से श्री गुरु तेग बहादर जी के पावन स्मरण में यह दो दिवसीय समागम आयोजित हुआ जिसे शब्दों में बांधना असंभव है, क्योंकि यह आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं का महासागर था।
तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब में 350 स्कूलों के बच्चों द्वारा गुरु तेग बहादर जी की वाणी का सामूहिक गायन…
और बिलोली की मुस्लिम बच्ची द्वारा इतिहास का अत्यंत सुंदर प्रस्तुतीकरण…
इन दृश्यों ने यह सिद्ध कर दिया कि गुरु तेग बहादर जी का बलिदान केवल किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि समूची मानवता की रक्षा के लिए था।
घर-घर जाकर शहीदी समागम में आने का निमंत्रण देना,
नगर कीर्तन में स्कूली बच्चों का लेझिम प्रदर्शन,
नगर कीर्तन मार्ग में गुरु ग्रंथ साहिब जी का भव्य स्वागत,
जगह-जगह नि:शुल्क लंगर सेवा,
हर स्कूल में गुरु महाराज के सम्मान में गीत गायन
हर सेवा में श्रद्धा थी… हर कदम पर प्रेम था…सेवा समर्पण भाव था और हर चेहरे पर संतोष झलक रहा था यही गुरु महाराज की सीख है जो प्रत्यक्ष रूप में देखने को मिली।
समागम स्थल पर जूते-चप्पल की सेवा,
लंगर सेवा,
मेडिकल कैंप,
ऐतिहासिक प्रदर्शन,
गतका तलवारबाजी,
इतिहास की पुस्तकें नि:शुल्क वितरण,
बहुत ही अच्छी कथा-कीर्तन,
दर्शन मार्ग सेवा,
दूर-दूर से आए यात्रियों और मेहमानों की रहने की उत्तम व्यवस्था,
और विशाल पंडाल में बैठने की सुंदर व्यवस्था
यह सब देखकर ऐसा लगा मानो सेवा स्वयं बोल रही हो – “वाहेगुरु”।
पुलिस प्रशासन द्वारा पूरे शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना,
भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका सतत ध्यान रखना,
और विशेष रूप से वाहनों की पार्किंग का अत्यंत सुव्यवस्थित, सुरक्षित और अनुशासित प्रबंध करना
यह सेवा भी इस समागम की सफलता की एक मजबूत नींव बनी।
इस समागम की एक और विशेषता यह रही कि
समागम मंडप के भीतर हो या बाहर
हर ओर अत्यंत उत्तम और स्पष्ट साउंड सिस्टम की व्यवस्था थी,
जिससे कथा, कीर्तन और कार्यक्रम की प्रत्येक बात श्रद्धालुओं के हृदय तक सीधे पहुँची।
साथ ही, जगह-जगह लगाई गई बड़ी-बड़ी एलईडी टीवी स्क्रीन के माध्यम से
दूर बैठने वाले श्रद्धालु भी कार्यक्रम को स्पष्ट रूप से देख और अनुभव कर सके।
यह व्यवस्था आधुनिक तकनीक और श्रद्धा के सुंदर संगम का उदाहरण बनी।
इस समागम की एक और अनुपम विशेषता यह रही कि
जो लोग किसी कारणवश शारीरिक रूप से नांदेड आकर उपस्थित नहीं हो सके,
ऐसे पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं को घर बैठे अनेक लाइव चैनलों के माध्यम से
इस दिव्य समागम के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
देश-विदेश में बैठे भक्तों ने मोबाइल और टीवी पर यह समागम देखा,
और इस प्रकार यह आयोजन केवल नांदेड तक सीमित न रहकर
विश्व भर के हृदयों से जुड़ गया।
पत्रकार भाइयों-बहनों, न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार,
स्वयंसेवकों की नम्र मुस्कान और मार्गदर्शन,
दूर-दूर से आने-जाने की सुव्यवस्था
इन सबने इस समागम को अनुशासन, समर्पण और भाईचारे का आदर्श बना दिया।
नांदेड की धरती पर ऐसा भव्य, भावपूर्ण और प्रेरणादायी समागम हुआ
जो निश्चित ही इतिहास में सुवर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा
और जिसकी स्मृति हर सहभागी के हृदय में सदा जीवित रहेगी।
इस दिव्य समागम को सफल बनाने वाले सभी आयोजकों,
सेवाभावी संस्थाओं,
स्थानिक प्रशासन,
पुलिस विभाग,
पत्रकार साथियों,
स्वयंसेवकों
और उपस्थित होकर पुण्य लाभ लेने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को
दिल से नमन…
दिल से धन्यवाद…
और कोटि-कोटि आभार।
यह समागम हमें सिखाकर गया
धर्म तलवार जोर से बदला नहीं जा सकता,
बल्कि त्याग, प्रेम और सत्य से जीवित रहता है।
अंतिम बात सच में यह समागम धार्मिक, सामाजिक तथा भाईचारा बढाने वाला एक पर्व साबित हुआ और इस में सभी राजनैतिक पार्टी के नेता एक मंच पर जमा हुये परंतु कीसी ने भी इस का राजनैतिक फायदा उठाने की कोशिश नहीं की या राजकीय वक्तव्य नहीं कीया और सच्चे दिल से मर्यादा अनुसार नमन करते हुये अपना किंमती समा दीया सच्चे दिल से गुरु महाराज के आगे शीश झुकाया
– राजेंद्र सिंघ शाहू
इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड
7700063999
