ईरान-अमेरिका संघर्ष: गीदड़ भभकियों और एआई वाले नक्शों का महामुकाबला आज की दुनिया में युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के ट्रुथ और फोटोशॉप के तीरों से लड़े जा रहे हैं। अगर आपको लगता है कि युद्ध के लिए रणनीति, साहस और नैतिकता की ज़रूरत होती है, तो शायद आप डोनाल्ड ट्रंप के नए नक्शे से परिचित नहीं हैं। स्रोत बताते हैं कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली (स्वघोषित) व्यक्ति, डोनाल्ड ट्रंप, इन दिनों बुरी तरह बौखलाए हुए हैं। उनकी बौखलाहट का आलम यह है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान का एक ऐसा नक्शा जारी किया है, जिसे देखकर लगता है कि उन्होंने चैट-जीपीटी या किसी सस्ते एआई टूल को काम पर लगा दिया था। नक्शों की बाजीगरी और दसों दिशाओं का प्रलाप ट्रंप साहब ने ईरान को घेरने के लिए जो नक्शा बनाया, उसमें एक-दो नहीं, बल्कि दसों दिशाओं से तीर ईरान की तरफ इशारा कर रहे हैं। यह किसी युद्ध की तैयारी कम और किसी स्कूल प्रोजेक्ट की ड्राइंग ज़्यादा लगती है। मजे की बात यह है कि इन तीरों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे मुल्कों की तरफ से भी ईरान पर हमला दिखाया गया है। अब कोई ट्रंप साहब को समझाए कि जिस मुल्क की अपनी साख दांव पर लगी हो, क्या वो ईरान जैसे ‘सिरफिरे’ दुश्मन से पंगा लेने की हिम्मत करेगा? लेकिन ट्रंप का मानना है कि बस नक्शे पर तीर खींच दो और युद्ध जीत लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि नैरेटिव बनाने से जंग नहीं जीती जाती, मिस्टर ट्रंप! यह कोई रियलिटी शो नहीं है जहाँ आप यू आर फायर्ड कहकर परमाणु बम चला देंगे। यूएई का सुरक्षित परमाणु प्लांट और जनरेटर का दुख इधर खाड़ी देशों में एक अलग ही नाटक चल रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जो अपने शानदार एयर डिफेंस के मुगालते में बैठा रहता था, वहाँ के बराकाहा परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर ड्रोन हमला हो गया। यूएई ने बड़े गर्व से प्रेस रिलीज जारी की कि हमने तीन में से दो ड्रोन तो गिरा दिए, लेकिन अफसोस! तीसरा ड्रोन अंदर घुस गया और परमाणु प्लांट के ठीक बगल में रखे एक बिजली के जनरेटर को नमस्ते कह आया। अब यहाँ कटाक्ष देखिए, हमलावर ने परमाणु प्लांट को नहीं उड़ाया, सिर्फ जनरेटर को निशाना बनाया। यह वैसा ही है जैसे कोई आपके घर की तिजोरी के पास खड़ा होकर आपको फोन करे और कहे, मैं अंदर आ चुका हूँ, अभी तो बस लाइट का फ्यूज निकाला है, अगली बार तिजोरी की बारी है। यूएई अब इस बात से परेशान है कि जिन हज़ारों करोड़ के निवेश की वो रक्षा करने का दावा करता था, वो एक छोटे से ड्रोन के सामने बौने साबित हो रहे हैं। और अमेरिका का हाल यह है कि वह यूएई के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी साख बचाना चाहता है। अमेरिका चाहता है कि यूएई आगे बढ़े, और अमेरिकी सैनिक शायद यूएई की वर्दी पहनकर लड़ें। इससे बड़ी फजीहत और क्या होगी कि दुनिया की महाशक्ति को अब छिपकर लड़ना पड़ रहा है? ईरान का पुष्पा अवतार: झुकेगा नहीं साला! दूसरी तरफ ईरान है, जो अब किसी फिल्म के हीरो की तरह पुष्पा अवतार में आ गया है। ईरान ने साफ कह दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। उनकी तैयारी का आलम यह है कि अब ईरान में नौजवानों और पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं और बुजुर्गों को भी AK-47 चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तेहरान के गलियों में अब शायद ‘गुड मॉर्निंग’ की जगह बंदूकों की लोड-अनलोड की आवाज़ें सुनाई देती होंगी। ईरान का संदेश लाउड एंड क्लियर है: जब तक हमारा आखिरी आदमी जिंदा है, वो तुम्हें गोली मारकर ही मरेगा। ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसीन रेजाई ने तो अमेरिका को सीधी चेतावनी दे दी है कि ओमान सागर को अमेरिकी सेना की कब्रगाह बना दिया जाएगा। उन्होंने सलाह दी है कि इससे पहले कि अमेरिकी नौसैनिकों को समुद्र की तलहटी में समाधि मिल जाए, उन्हें घेराबंदी खत्म कर देनी चाहिए। ऐसा लगता है कि ईरान ने अब कूटनीति की मेज को आग लगा दी है और हाथ में केवल ट्रिगर रखा है। ट्रंप की चीन यात्रा: खाली हाथ आए, खाली हाथ जाएंगे ट्रंप साहब को लगा था कि वो चीन जाएंगे और वहां से ईरान को डराने का कोई मंत्र लेकर आएंगे। लेकिन सूत्रों के अनुसार, उनकी चीन यात्रा एक महा-फ्लॉप शो रही। उन्होंने अपने दामाद और उपराष्ट्रपति को दर-दर की ठोकरें खाने के लिए भेजा, लेकिन चीन ने आधिकारिक तौर पर उन्हें भाव ही नहीं दिया। वापस लौटकर ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को फोन किया। कल्पना कीजिए उस बातचीत की ट्रंप कह रहे होंगे, बीबी, तुमने मुझे किस झमेले में फँसा दिया? और नेतन्याहू सोच रहे होंगे कि उन्हें दुनिया का सबसे मूर्ख राष्ट्रपति ही साथी के तौर पर क्यों मिला। सोशल मीडिया पर तो चर्चा यहाँ तक है कि नेतन्याहू ने ट्रंप का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए किया है। अब दोनों नेता सिचुएशन रूम में बैठकर फोटो खिंचवा रहे हैं और दुनिया को डराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सवाल वही है: क्या फोटो खिंचवाने और ट्वीट करने से ईरान जैसे देश घुटने टेक देंगे, जिसने दशकों की नाकेबंदी झेली है? निष्कर्ष: कयामत का इंतजार कुल मिलाकर, यह संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ एक तरफ एआई से बने नक्शे हैं और दूसरी तरफ हाथ में AK-47 थामे आम नागरिक। ट्रंप को लगता है कि वो आर्थिक नाकेबंदी और धमकियों से शांति समझौता करवा लेंगे, जबकि ईरान कह रहा है कि फायर फ्लावर समझे थे क्या? फायर है मैं! यह पूरा घटनाक्रम किसी त्रासदी से कम नहीं है, लेकिन इसमें छिपी विडंबना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। एक महाशक्ति अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है, और एक छोटा सा मुल्क मरने की कसम खा चुका है। इस युद्ध में अगर किसी की जीत होगी, तो वो शायद केवल उन हथियार बनाने वाली कंपनियों की होगी, जो इस तमाशे को दूर बैठकर देख रही हैं। बाकी पूरी दुनिया के लिए तो यह जंग किसी ‘कयामत’ से कम नहीं होने वाली है। अब देखना यह है कि ट्रंप का अगला ट्वीट क्या होता है या ईरान का अगला निशाना कौन सा जनरेटर बनता है। Kanthak Suryatal Post Views: 879 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation जर तुमच्याकडे पैसा असेल, तर कायदा ही केवळ एक वाटाघाटीची वस्तू उरते. ट्रम्प कुछ रियायते देने को तयार पर इरान मानेगा क्या?