14 अप्रैल को पूरे विश्व में वैशाखी का पावन पर्व अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। यह ऐतिहासिक दिवस श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना का प्रतीक है, जिसने मानवता को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, समानता और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। इस महान अवसर पर “पंज प्यारे” का महत्व विशेष रूप से उल्लेखनीय है। भाई दया सिंघ जी दया और करुणा के प्रतीक हैं—ऐसी दया जो अत्याचार के खिलाफ खड़े होने की शक्ति देती है। भाई धर्म सिंघ जी धर्म और सत्य के मार्ग पर निडरता से चलने की प्रेरणा देते हैं। भाई मोहकम सिंघ जी संसार के मोह से ऊपर उठकर आत्मिक जीवन जीने का संदेश देते हैं। भाई साहिब सिंघ जी आत्मसम्मान, मर्यादा और श्रेष्ठता का प्रतीक हैं, जबकि भाई हिम्मत सिंघ जी साहस और वीरता का स्वरूप हैं। इन पांचों नामों में छिपा संदेश स्पष्ट करता है कि जब मनुष्य में दया आती है, तो वह धर्म के मार्ग पर चलता है; धर्म के साथ मोह कम होता है; मोह कम होने से आत्मिक ऊंचाई प्राप्त होती है और अंततः साहस एवं निडरता का जन्म होता है। यही खालसा पंथ की आत्मा है। इतिहास का एक अद्भुत और प्रेरणादायक पहलू यह भी है कि वर्ष 1699 में श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी ने पूरे देश के लोगों को आनंदपुर साहिब आने का निमंत्रण दिया। उस समय न तो यात्रा के आधुनिक साधन थे, न कोई मैप और न ही संपर्क के साधन, फिर भी गुरु के एक बुलावे पर देश के कोने-कोने से हजारों लोग आनंदपुर साहिब पहुंच गए—यह गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास का अनुपम उदाहरण है। विशेष रूप से श्री गुरु नानक देव जी ने वर्षों पहले कर्नाटक के बिदर क्षेत्र में मानव कल्याण और समानता का जो संदेश दिया था, उसका प्रभाव इतना गहरा था कि अनेक वर्षों बाद भी वहां के लोग श्री गुरु गोबिंद सिंघ जी के बुलावे पर आनंदपुर साहिब पहुंचे। इन्हीं में से बिदर के भाई साहिब सिंघ जी को “पंज प्यारे” बनने का महान सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह घटना दर्शाती है कि गुरु की वाणी और उपदेश समय और दूरी की सीमाओं से परे होते हैं। सिक्ख धर्म के मूल सिद्धांत—“नाम जपो, कीरत करो, वंड छको”—आज भी समाज को एकता, सेवा और सत्य का मार्ग दिखाते हैं। इस पावन अवसर पर संचखड गुरुद्वारे में रैन सवाई कीर्तन, प्रतिदिन सुखमणी साहिब पाठ तथा कथा-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है, जिससे संगत गुरु वाणी से जुड़कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रही है। विशेष रूप से 14 अप्रैल को भव्य पारंपरिक महल्ला संचखड गुरुद्वारे से निकाला जाएगा। यह महल्ला हल्लाबोल चौक पहुंचेगा, जहां अरदास के उपरांत “बोले सो निहाल सत् श्रीअकाल” के जयघोष के साथ पूरे नगर में भ्रमण करेगा। यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का जीवंत प्रतीक है। इस पावन वैशाखी पर्व के अवसर पर समस्त संगत को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। गुरु महाराज सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और हमें उनके बताए मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें। -राजेंद्र सिंघ शाहू इलेक्ट्रिकल ट्रैनंर नांदेड 7700063999 Kanthak Suryatal Post Views: 910 Facebook WhatsApp Telegram Twitter LinkedIn Snapchat Threads Post navigation नांदेड विभागात व्यापक तिकीट तपासणी मोहीम राबविण्यात आली खत काळाबाजार करणाऱ्यांचे आता खरेच धाबे दणाणेल काय ?